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रांची: विश्वविद्यालय का नाम बदलने में देरी पर बवाल, सड़क पर उतरे आदिवासी छात्र

रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) का नाम बदलने को लेकर विवाद गहरा गया है। करीब डेढ़ साल पहले राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसले को लागू करने की मांग को लेकर आदिवासी छात्र संगठनों…

रांची: विश्वविद्यालय का नाम बदलने में देरी पर बवाल, सड़क पर उतरे आदिवासी छात्र
(फोटो: IANS)

रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) का नाम बदलने को लेकर विवाद गहरा गया है। करीब डेढ़ साल पहले राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसले को लागू करने की मांग को लेकर आदिवासी छात्र संगठनों ने लगातार दूसरे दिन सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के पास सड़क पर टायर जलाए और बांस-बल्ली लगाकर रास्ता रोक दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

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यह पूरा विवाद झारखंड सरकार के एक कैबिनेट फैसले से जुड़ा है, जो अब तक लागू नहीं हो पाया है। 8 मई 2025 को तत्कालीन हेमंत सोरेन सरकार की कैबिनेट ने विश्वविद्यालय का नाम बदलकर महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर बुधु भगत के नाम पर रखने का निर्णय लिया था। लेकिन यह फैसला अब तक कागजों तक ही सीमित है और विश्वविद्यालय पुराने नाम से ही चल रहा है।

विरोध प्रदर्शन का कारण और घटनाक्रम

गुरुवार को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में छात्र अधिकार मोर्चा, आदिवासी छात्र संघ और सरना समिति के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लाल रंग से 'शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय' लिख दिया था। लेकिन गुरुवार देर रात किसी ने इस लिखे हुए नाम को मिटा दिया। शुक्रवार को जब यह बात सामने आई तो आदिवासी छात्र संगठन भड़क गए और बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह शहीद का अपमान है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की है कि कैबिनेट के फैसले को तत्काल लागू किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने गेट पर लिखे गए नाम को मिटाने वालों की पहचान कर कार्रवाई करने और विश्वविद्यालय परिसर में वीर बुधु भगत की प्रतिमा स्थापित करने की भी मांग की है।

राजनीतिक बयान और विश्वविद्यालय का इतिहास

इस मामले पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा कि यह प्रशासनिक देरी का मामला है और झारखंड के शहीदों के सम्मान से जुड़ा है, इसलिए सरकार को इस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वीर बुधु भगत ने 1831-32 के कोल विद्रोह का नेतृत्व किया था और वे आदिवासी समाज के गौरव और संघर्ष के प्रतीक हैं।

यह विश्वविद्यालय पहले रांची कॉलेज के नाम से जाना जाता था। साल 2017 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने इसे अपग्रेड कर विश्वविद्यालय का दर्जा देते हुए इसका नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया था। इस विवाद पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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