बीजेपी-जेडी(यू) पर किए थे क़रारे हमले, मुख्यमंत्री बनने का था सुनहरा मौक़ा

0

बिहार की राजनीति में एक ऐसा भी वक़्त आया जब हर जगह सुर्खियों में भारतीय सियासत का एक चेहरा चाहा जिसे उनके विरोधी मौसम वैज्ञानिक कहते हैं। एक ऐसा चेहरा जो सत्ता और मुख्यमंत्री की चाबी जेब में लेकर घूमता है। जी हां, ये ज़िक्र है लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान का। साल 2005 में बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में जब जनता ने किसी भी सियासी पार्टी को बहुमत का भरोसा नहीं दिया तो तमाम राजनीतिक पार्टियों ने सत्ता और मुख्यमंत्री पद की गेंद रामविलास पासवान के पाले में डाल दी लेकिन, उन्होंने इन्कार कर दिया।

जनता का 29 सीट के रूप में मिला था प्यार, सियासी पार्टियों ने पेश की थी मुख्यमंत्री की कुर्सी

सियासत में मौसम वैज्ञानिक कहे जाने वाले एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान पर पहले जनता का प्यार, और फिर राजनीतिक पार्टियों की सीएम बनाने की पेशकश ऐसी मेहरबान हुई कि उनके पास बिहार की सत्ता संभालने का सुनहरा मौक़ा था। उनकी पार्टी को चुनाव में 29 सीटें ज़रूर मिलीं थीं और ये सत्ता की पोटली हासिल करने के लिए काफ़ी भी थी लेकिन, चुनाव में 75 सीटें जीतने वाली राजेडी और 55 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही जेडीयू ने मुख्यमंत्री की पेशकश दी लेकिन, रामविलास पासवान ने अपने उसूलों से समझौता करना मुनासिब नही समझा और मुख्यमंत्री पद की पेशकश ठुकरा दी। मगर, इसी ज़िद ने उन्हें कभी बिहार की सत्ता नहीं सौंपी।

सत्ता नहीं ली लेकिन, अपने विरोधियों पर किए क़रारे हमले

रामविलास पासवान को मौसम विज्ञानिक ऐसे ही नहीं कहा जाता। वह अपने सियासी विरोधियों पर भी मौसम के हिसाब से क़रारे हमले करते हैं। 2005 के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद, जब राज्य में सरकार बनान पर माथा पच्ची चल रही थी तो सबकी निगाहें एलजेपी अध्यक्ष रामविलास पासवान पर थी। बीजेपी और जेडी(यू) से समर्थन लेने पर पासवान ने कहा था “मैं न तो सांप्रदायिक बीजेपी और न ही जातिवादी और भ्रष्टचार में लिप्त जेडीयू से हाथ मिलाऊंगा और न ही समर्थन लूंगा और न ही समर्थन दूंगा”। पासवान अपने विरोधियों को घेरने में यहीं नहीं रूके। उन्होंने राजेडी पर भी क़रारे हमले किए और कहा कि यादव परिवार द्वारा 15 सालों तक राज्य में फैलाई गई गंदगी को साफ़ करने के लिए वो थोड़ी देर के लिए राष्ट्रपति शासन पसंद करेंगे।

फिर बीजेपी-जेडी(यू) की बनी सरकार

त्रिशंकु विधानसभा होने पर बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। जिसके बाद अक्टूबर 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में जेडी(यू) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। वहीं, दूसरी तरफ़ अपने उसूलों का राजनीतिक फ़ायदे के लिए त्याग करके मुख्यमंत्री की कुर्सी को ठोकर मारने वाले रामविलास पासवान की पार्टी को महज़ 10 सीटें मिलीं और मुख्यमंत्री बनने का सपना 10 सीटों के अंदर क़ैद हो गया। उसके बाद अभी तक बिहार की राजनीति और पासवान के जीवन में ऐसा सुनहरा मौक़ा कभी नहीं आया।