यूपी राज्यसभा चुनाव: सपा की तीसरी सीट पर सस्पेंस खत्म? अखिलेश के '403 सीटों' वाले पोस्ट से बदले सियासी संकेत
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक ट्वीट ने सियासी अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स'…
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक ट्वीट ने सियासी अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अखिलेश ने लिखा, "अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।" इस पोस्ट के बाद माना जा रहा है कि सपा अब राज्यसभा की तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने की दौड़ से पीछे हट गई है और अपना पूरा ध्यान आगामी विधानसभा चुनाव पर केंद्रित कर रही है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश यादव के इस संदेश को पार्टी की भविष्य की रणनीति का एक स्पष्ट संकेत मान रहे हैं। 'तीन' से उनका आशय राज्यसभा की उस तीसरी सीट से था, जिसे जीतने के लिए सपा के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है। वहीं, 'चार सौ तीन' का ज़िक्र सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सीटों की ओर इशारा करता है, जो पार्टी का अंतिम लक्ष्य है।
राज्यसभा का अंकगणित
उत्तर प्रदेश की एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है। सपा ने धनराज लखवानी और प्रो. रामगोपाल यादव को पहले ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। मौजूदा विधानसभा में पार्टी और सहयोगी कांग्रेस के वोटों को मिलाकर दो सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन तीसरी सीट एक बड़ी चुनौती थी।
तीन उम्मीदवारों को जिताने के लिए पार्टी को कुल 111 वोटों की जरूरत पड़ती। दो सीटों पर 74 वोट खर्च करने के बाद सपा के पास कुछ ही अतिरिक्त वोट बचते, जिससे तीसरी सीट के लिए लगभग 12 और विधायकों के समर्थन की दरकार होती। पार्टी के कुछ विधायकों के पिछले चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के रिकॉर्ड को देखते हुए यह आंकड़ा जुटाना मुश्किल माना जा रहा था।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस पोस्ट पर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने 'एक्स' पर तंज कसते हुए लिखा, "मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स! वैसे कभी-कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया। रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।"
दूसरी तरफ, भाजपा गठबंधन (अपना दल, रालोद, सुभासपा, निषाद पार्टी और अन्य समर्थकों को मिलाकर) के पास लगभग 293 विधायकों का समर्थन है। इस गणित के हिसाब से भाजपा को आठवीं सीट जीतने के लिए 296 वोटों की ज़रूरत होगी, जिसके लिए उसे कुछ अतिरिक्त वोटों का इंतज़ाम करना पड़ सकता है।
इनपुट: IANS



