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एलन मस्क की टिप्पणी पर राजीव चंद्रशेखर का जवाब: भारत की तकनीकी नीतियां सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित

स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क के इस सवाल पर कि भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने विस्तृत प्रतिक्रिया दी…

एलन मस्क की टिप्पणी पर राजीव चंद्रशेखर का जवाब: भारत की तकनीकी नीतियां सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित
(फोटो: IANS)

स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क के इस सवाल पर कि भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की तकनीकी और दूरसंचार नीतियां अब किसी भी नई तकनीक को अनुमति देने से पहले राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा पहलुओं का गहन मूल्यांकन करती हैं।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि भारत का तकनीकी क्षेत्र अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीन मूल सिद्धांतों पर काम करता है: ओपन, सेफ एंड ट्रस्टेड तथा अकाउंटेबल (OSTA)। उन्होंने कहा कि भले ही एक समय में भारत का दूरसंचार क्षेत्र अपारदर्शिता और भ्रष्टाचार से ग्रस्त रहा हो, लेकिन अब नीतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।

नीति के तीन प्रमुख स्तंभ

राजीव चंद्रशेखर ने इन सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए कहा कि 'ओपन' का अर्थ है कि बाजार में किसी एक कंपनी का वर्चस्व न हो और सभी को प्रतिस्पर्धा का समान अवसर मिले। दूसरे सिद्धांत, 'सेफ एंड ट्रस्टेड' के तहत नेटवर्क और प्लेटफॉर्म का सुरक्षित व भरोसेमंद होना अनिवार्य है। वहीं, 'अकाउंटेबिलिटी' यह सुनिश्चित करती है कि टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में हर पक्ष की कानूनी जवाबदेही तय हो।

राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख चिंता

पूर्व मंत्री ने माना कि स्टारलिंक एक 'बेहद प्रभावशाली तकनीक' है और उन्होंने स्वयं इसका उपयोग किया है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसे देश के लिए, जिसने दशकों तक आतंकवाद और विद्रोह का सामना किया है, सैटेलाइट-आधारित संचार सेवाओं से जुड़े सुरक्षा पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों का उदाहरण देते हुए कहा कि सैटेलाइट-आधारित वीओआईपी और एन्क्रिप्टेड संचार सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं, जिनसे निपटने के लिए नई व्यवस्थाओं की जरूरत है।

क्या था एलन मस्क का सवाल?

यह पूरी बहस तब शुरू हुई जब एलन मस्क ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में सवाल उठाया था। उन्होंने लिखा कि स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी ने पिछले पांच सालों में भारत सरकार के सभी नियमों का पालन किया है, फिर भी लाइसेंस क्यों नहीं दिया गया। मस्क ने अपनी टिप्पणी में यह भी पूछा था कि क्या भारत में वास्तविक निर्णयकर्ता उद्योगपति मुकेश अंबानी हैं, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया।

लाइसेंस प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति

चंद्रशेखर ने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने सभी सैटेलाइट संचार सेवा प्रदाताओं को स्पष्ट कर दिया है कि वे लगभग एक ही चरण में हैं। उन्होंने कहा कि लाइसेंस प्रक्रिया में सुरक्षा मंजूरी को प्राथमिकता दी जा रही है। पहले कंपनियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता की जांच पूरी की जाएगी, जिसके बाद स्पेक्ट्रम आवंटन जैसे मुद्दों पर विचार होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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