रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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उत्तर प्रदेश: राजस्व मामलों में ढिलाई पर बड़ी कार्रवाई, योगी सरकार ने 5 तहसील अधिकारियों को किया निलंबित

उत्तर प्रदेश में राजस्व अदालतों में मुकदमों के निपटारे में हो रही देरी पर योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद, राजस्व परिषद ने काम में लापरवाही बरतने के…

उत्तर प्रदेश: राजस्व मामलों में ढिलाई पर बड़ी कार्रवाई, योगी सरकार ने 5 तहसील अधिकारियों को किया निलंबित
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश में राजस्व अदालतों में मुकदमों के निपटारे में हो रही देरी पर योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद, राजस्व परिषद ने काम में लापरवाही बरतने के आरोप में चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

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यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल ही में की गई एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद हुई है। उस बैठक में सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि राजस्व से जुड़े मामलों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कठोर एक्शन होगा।

किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि निलंबन का यह फैसला उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दर्ज मामलों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया। समीक्षा में पाया गया कि कई अधिकारियों के स्तर पर मुकदमों के निपटारे की गति संतोषजनक नहीं थी। निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैं:

  • पवन कुमार सिंह: तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार (रानीगंज, प्रतापगढ़), वर्तमान में तहसीलदार (प्रयागराज)
  • अतुल हर्ष: तहसीलदार (बलिया)
  • हरेराम यादव: तत्कालीन नायब तहसीलदार (धनघटा), वर्तमान में तहसीलदार (गोण्डा)
  • आनन्द ओझा: तहसीलदार (खलीलाबाद, संतकबीर नगर)
  • विवेक कुमार सिंह: नायब तहसीलदार (सरोजनीनगर, लखनऊ)

आगे भी जारी रहेगी निगरानी

राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि निलंबन के साथ ही इन पांचों अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जांच के आधार पर उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और आगे की कार्रवाई होगी। परिषद के अनुसार, यह कोई एक बार की कार्रवाई नहीं है, बल्कि लंबित राजस्व वादों के निपटारे की निगरानी लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों के काम की नियमित समीक्षा की जाएगी और लापरवाही या उदासीनता पाए जाने पर भविष्य में भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम नागरिकों और किसानों को समय पर न्याय मिल सके।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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