Rajasthan CM के तौर पर अशोक गहलोत की पसंद कौन?, सचिन पायलट कैसे देंगे मात, पढ़ें A टु Z डिटेल्स

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Rajasthan CM के तौर पर अशोक गहलोत की पसंद कौन?, सचिन पायलट कैसे देंगे मात, पढ़ें A टु Z डिटेल्स

जयपुर: राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। यह सवाल इन दिनों सबके जहन में है। हर कोई यह जानना चाहता है कि अशोक गहलोत के दिल्ली जाने के बाद प्रदेश की कमान किसके हाथ में होगी। चूंकि बीते दो साल से गहलोत लगातार पायलट पर सियासी तंज कसते रहे हैं। ऐसे में सियासी हल्कों में इसी बात की चर्चा है कि अशोक गहलोत कभी नहीं चाहेंगे कि सचिन पायलट राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। तो फिर अब लोगों के दिमाग में सही सवाल आ रहा है कि आखिर गहलोत की पसंद कौन हैं।

डॉ. सीपी जोशी क्यों है गहलोत की पहली पसंद
अशोक गहलोत के पसंदीदा नेताओं में डॉ. सीपी जोशी का नाम सबसे ऊपर है। डॉ. सीपी जोशी कद्दावर कांग्रेसी नेता हैं। वर्तमान में राजसमंद जिले के नाथद्वारा विधानसभा के विधायक और पूर्व सांसद डॉ. जोशी डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में केन्द्रीय मंत्री रह चुके हैं। वे 2008 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी राजस्थान के मुख्यमंत्री के दावेदार थे लेकिन 1 वोट से चुनाव हार गए थे। गांधी परिवार के नजदीकी होने के साथ ही डॉ. सीपी जोशी राजनीति के हर दांव पेच जानते हैं। विरोधी दलों के हर आरोप का वे बेखुबी और तार्किक जवाब देने में माहिर हैं।

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2018 के विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद डॉ. सीपी जोशी का नाम मुख्यमंत्री के दावेदारों में आया था लेकिन जब अशोक गहलोत को सीएम बनाने का निर्णय हुआ तो डॉ. जोशी को सम्मानजनक पद देना था। इसी कारण उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया। गहलोत डॉ. सीपी जोशी को आगे लाना चाहते हैं। पहला कारण तो यह है कि डॉ. जोशी गांधी परिवार के विश्वसनीय नेताओं में शामिल है और दूसरा वे केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। दूसरा कारण डॉ. सीपी जोशी को इसलिए आगे करना चाहते हैं ताकि वे सचिन पायलट का विकल्प बन सके।

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डॉ. बीडी कल्ला का नाम भी चर्चाओं में
डॉ. बुलाकीदास कल्ला बीकानेर पश्चिम सीट से कांग्रेस विधायक हैं। वे छठी बार विधायक बने हैं और वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा मंत्री हैं। सीनियर नेता होने के साथ डॉ. कल्ला अशोक गहलोत के नजदीकी नेताओं में से एक हैं। गहलोत हमेशा से ही कल्ला को आगे बढाना चाहते रहे हैं। विधानसभा चुनावों से पहले टिकट वितरण में कल्ला का नाम गहलोत की पसंद से ही जोड़ा जाता है। गहलोत के नजदीकी रिश्ते होने के कारण ही डॉ. कल्ला को मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभाग दिया जाता रहा है। डॉ. कल्ला स्वर्ण समाज से हैं और गहलोत चाहते हैं कि स्वर्ण समाज को कांग्रेस से जोड़े रखने के लिए यह एक सियासी चाल काफी निर्णायक साबित हो सकती है।

डोटासरा को लेकर खेला जा सकता है दांव
राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के दावेदारों की सूची में गोविन्द सिंह डोटासरा का नाम भी चर्चाओं में है। डोटासरा सीकर के लक्ष्मणगढ सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं। जाट समाज से आने वाले डोटासरा प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। वे स्वभाव से बेहद सख्त माने जाते हैं। कई बार अपने बयानों और कठोर निर्णयों को लेकर डोटासरा चर्चा में रहते है।

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गहलोत के वफादार नेताओं में शामिल गोविन्द सिंह डोटासरा पूर्व में शिक्षा मंत्री थे। जुलाई 2020 में जब सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने बगावती तेवर अपनाए थे तब कांग्रेस ने पायलट को उपमुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ के पद से बर्खास्त किया था। उस समय डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी गई थी। बेबाक अंदाज के डोटासरा गहलोत के लिए ढाल के रूप में पेश आते हैं। विपक्ष की ओर से किसी भी तरह का आरोप लगाए जाने पर वे आक्रामक अंदाज में जवाब देते हैं।

गहलोत की चली तो इनमें से ही बनेगा राजस्थान CM
हालांकि अशोक गहलोत लगातार कहते आए हैं कि वे आलाकमान के फैसले का स्वागत करेंगे। लेकिन इससे पहले वे प्रदेश के हालातों की पूरी तस्वीर से हाईकमान को रूबरू कराएंगे। गहलोत बताएंगे कि अगर पायलट को प्रदेश का सीएम बना दिया जाए तो पार्टी को क्या क्या नुकसान हो सकते हैं। साथ ही गहलोत की पसंद का मुख्यमंत्री बनाए जाने पर प्रदेश में कांग्रेस का भविष्य क्या हो सकता है। गहलोत और अन्य नेताओं से पूरा फीडबैक लेने के बाद ही हाईकमान प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री का नाम फाइनल करेगा। अगर अशोक गहलोत की चली तो पायलट के बजाय कोई तीसरा ही राजस्थान का मुख्यमंत्री होगा।

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