सोमवार, 2 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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आर्थिक सुरक्षा पर QUAD का बड़ा दांव: महत्वपूर्ण खनिजों, AI और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाएंगे भारत समेत चार देश

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक और सामरिक साझेदारी को मजबूत करते हुए क्वाड देशों ने एक नई दिशा तय की है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया अब महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals), आर्टिफिशियल…

आर्थिक सुरक्षा पर QUAD का बड़ा दांव: महत्वपूर्ण खनिजों, AI और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाएंगे भारत समेत चार देश
(फोटो: IANS)

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक और सामरिक साझेदारी को मजबूत करते हुए क्वाड देशों ने एक नई दिशा तय की है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया अब महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ाएंगे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फैसला अमेरिका के अटलांटा में 31 अक्टूबर को संपन्न हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में सामने आया।

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बैठक में शामिल विदेश मंत्री — भारत के एस. जयशंकर, अमेरिका के मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की पेनी वोंग और जापान के तोशिमित्सु मोतेगी — ने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने वाले आर्थिक दबाव, मनमाने निर्यात प्रतिबंधों और बाजार को विकृत करने वाली नीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

आर्थिक और तकनीकी साझेदारी पर ज़ोर

खनिज और सेमीकंडक्टर: क्वाड देशों का एक बड़ा फ़ोकस महत्वपूर्ण खनिजों पर है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर सेमीकंडक्टर तक के लिए ज़रूरी हैं। इस पहल के तहत इलेक्ट्रॉनिक कचरे से खनिज निकालने, नए प्रसंस्करण संयंत्र विकसित करने और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बनाने पर काम होगा। अमेरिका ने 'भारत और आसियान देशों में कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने वाली सुविधाओं' के लिए एक करोड़ डॉलर की सहायता की प्रतिबद्धता जताई है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी एक देश पर निर्भरता कम करना है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद AI तकनीक की पहुँच बढ़ाने के लिए चारों देश 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का इरादा रखते हैं। यह सहयोग क्वाड 'एसआई एक्सेलेरेटर' के माध्यम से किया जाएगा, जहाँ 'एसआई' का मतलब सुपर इंटेलिजेंस है।

समुद्री और डिजिटल सुरक्षा

बैठक में समुद्री सुरक्षा को आर्थिक समृद्धि के लिए ज़रूरी बताया गया। होर्मुज स्ट्रेट, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण मार्गों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसी दिशा में, 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच चेन्नई से पर्थ तक एक समुद्री पर्यवेक्षक यात्रा भी आयोजित की गई थी। भविष्य में, 2027 में 'सी ड्रैगन' अभ्यास के दौरान पहला संयुक्त अभ्यास करने और समुद्री क्षेत्र जागरूकता पर एक संगोष्ठी आयोजित करने की भी योजना है।

डिजिटल मोर्चे पर, क्वाड देश सुरक्षित समुद्री डेटा केबल नेटवर्क विकसित करने और 5जी, 6जी तथा ओपन-आरएएन जैसी तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं

आर्थिक सहयोग को ज़मीनी स्तर पर उतारने के लिए पहली बार 'क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम' के आयोजन की घोषणा की गई, जिसमें उद्योग जगत और सरकार के बीच साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध से निपटने, आपदा प्रबंधन में आपसी सहयोग बढ़ाने (जिसमें नेपाल बाढ़ में भारत की भूमिका का उल्लेख हुआ) और ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मजबूत करने जैसे विषयों पर भी सहमति बनी। यह बैठक इस वर्ष क्वाड विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी।

इनपुट: IANS

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