पंजाब: जलालाबाद में कांग्रेस को बड़ा झटका, 17 साल बाद जीत दिलाने वाले पूर्व MLA रमिंदर आवला अकाली दल में शामिल
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। जलालाबाद से पार्टी के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता रमिंदर सिंह आवला ने कांग्रेस छोड़कर शिरोमणि अकाली दल (SAD) का…
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। जलालाबाद से पार्टी के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता रमिंदर सिंह आवला ने कांग्रेस छोड़कर शिरोमणि अकाली दल (SAD) का दामन थाम लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने खुद उनका पार्टी में स्वागत किया। आवला वही नेता हैं जिन्होंने 2019 के उपचुनाव में अकाली दल का 17 साल पुराना किला भेदकर कांग्रेस को जीत दिलाई थी।
रमिंदर आवला का यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने जलालाबाद सीट पर अकाली दल के उम्मीदवार को करीब 16,000 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। यह सीट खुद अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का गढ़ रही है, जहां से वे तीन बार चुने गए थे।
बादल ने जताया 2027 में जीत का भरोसा
आवला के पार्टी में आने पर सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा, "वरिष्ठ नेता और जलालाबाद से पूर्व विधायक, रमिंदर सिंह आवला का शिरोमणि अकाली दल में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है।" उन्होंने आगे कहा कि जलालाबाद ने अकाली सरकारों के दौरान "क्रांतिकारी विकास" देखा है। बादल ने विश्वास जताया कि आवला के जुड़ने से न सिर्फ जलालाबाद बल्कि पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में पार्टी मजबूत होगी, जिससे 2027 में अकाली दल की जीत सुनिश्चित हो सकेगी।
कांग्रेस में आवला का लंबा सफर
रमिंदर सिंह आवला का कांग्रेस में एक लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा है। उन्होंने बूथ स्तर के कार्यकर्ता से अपना सफर शुरू किया और पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष पद तक पहुंचे। बाद में वे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) में महासचिव भी रहे। उनकी काबिलियत को देखते हुए पार्टी ने उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में सचिव बनाकर कर्नाटक राज्य का प्रभार भी सौंपा था। उनका पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति मानी जा रही है।
इनपुट: IANS



