पुणे पोर्श हादसा: पीड़ित अनीश के माता-पिता ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर की बड़ी मांग, जनता का जताया आभार
पुणे के चर्चित पोर्श कार हादसे में जान गंवाने वाले इंजीनियर अनीश अवधिया के माता-पिता ने नाबालिगों से जुड़े कानून में एक बड़े बदलाव की मांग की है। पुणे पहुंचकर उन्होंने पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से…
पुणे के चर्चित पोर्श कार हादसे में जान गंवाने वाले इंजीनियर अनीश अवधिया के माता-पिता ने नाबालिगों से जुड़े कानून में एक बड़े बदलाव की मांग की है। पुणे पहुंचकर उन्होंने पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मुलाकात की और कहा कि गंभीर अपराधों के लिए बालिग होने की उम्र 18 से घटाकर 16 साल कर दी जानी चाहिए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस केस की जांच पर संतोष जताते हुए जनता और मीडिया के लगातार समर्थन के लिए उनका धन्यवाद भी किया।
अनीश की मां सविता अवधिया ने कहा, "आजकल हर कुछ दिन में नया केस सुनने को मिलता है कि किसी नाबालिग ने किसी को मार दिया। इसलिए सरकार को बालिग होने की गाइडलाइन 18 साल से घटाकर 16 साल कर देनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि आजकल के बच्चे समय से पहले ही परिपक्व हो रहे हैं और 16 साल की उम्र में ड्रग्स, शराब और गाड़ी चलाने जैसे कामों में लिप्त हो जाते हैं। सविता अवधिया ने उम्मीद जताई कि मीडिया और पुलिस के माध्यम से उनकी यह मांग सरकार तक पहुंचेगी और इस पर विचार किया जाएगा।
जांच पर भरोसा, न्याय की उम्मीद
अनीश के माता-पिता ने पुणे पुलिस द्वारा की जा रही जांच को सही दिशा में बताया। सविता ने कहा, "जांच बिल्कुल सही ट्रैक पर चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।" उन्होंने शुरुआती ढिलाई पर भी बात की, जब आरोपी को 15 घंटे में ही छोड़ दिया गया था। उन्होंने कहा, "पूरी कोशिश की गई थी कि केस ही पलट जाए और आरोपी फ्री हो जाए... लेकिन पुणे पुलिस ने बहुत अच्छे से इन्वेस्टिगेशन किया और न्याय दिलाने में सहायता की।" वहीं, अनीश के पिता ओम अवधिया ने विधायक सुनील टिंगरे को मिली क्लीन चिट पर कहा कि जब पुलिस प्रशासन ने जांच के बाद यह फैसला लिया है, तो वह सही होगा।
बेटे को याद कर भावुक हुए माता-पिता
अपने बेटे को खोने का दर्द बयां करते हुए सविता ने कहा कि शव को घर पहुंचने में 52 घंटे लग गए और वह आखिरी बार उसे गले भी नहीं लगा सकीं। उन्होंने कहा, "अनीश बहुत इंटेलिजेंट था, उसके बड़े सपने थे। वह कहता था कि मम्मी-पापा, 'मैं विदेश जाऊंगा, आप लोगों को ले जाऊंगा।'" पिता ओम अवधिया ने भी बेटे को याद करते हुए कहा कि परिवार में सब खत्म हो गया।
अंत में, उन्होंने इस मुश्किल समय में साथ देने के लिए पुणे और महाराष्ट्र की जनता का विशेष आभार व्यक्त किया। ओम अवधिया ने कहा, "हम मराठी भाषा को लेकर थोड़ा डर रहे थे, लेकिन आज लगता है मराठी मानुष गलत नहीं हैं, सब अपने हैं।" उन्होंने यह भी मांग की कि इस केस को एक मिसाल के तौर पर पेश किया जाए ताकि लोग शराब पीकर गाड़ी चलाने से डरें।
इनपुट: IANS



