रेत खनन के विरोध में बिहार में बंद, यातायात बुरी तरह प्रभावित

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बिहार में रेत की मौजूदा किल्लत को दूर करने और बेहतर बंदोबस्त करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार शाम ही अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर नए सिरे विचार-विमर्श करने का निर्णय कर लिया था लेकिन सरकार ने बैठक के बाद यूटर्न लेते हुए राज्य में पुरानी रेत नीति ही लागू रहने की बात कही. इसके बाद बिहार सरकार द्वारा नई रेत खनन नीति वापस ले लिए जाने के बावजूद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा इस नीति के विरोध में बुलाए गए एकदिवसीय बिहार बंद का गुरुवार को वाहनों की आवाजाही पर ख़ासा असर देखा जा रहा है. हाजीपुर पटना महात्मा गांधी सेतु पुरी तरह जाम होने से एक महिला मरीज की मौत हो गई.

कई जगहों पर बंद करके समर्थकों ने सड़कों पर आगजनी कर रास्तों को अवरुद्ध कर दिया है और कई स्थानों पर ट्रेनें भी रोकी गई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बंद समर्थक सुबह से ही सड़कों पर उतर आए हैं। बंद के कारण पटना के अधिकांश निजी स्कूलों को पहले ही बंद रखा गया है.

राजद के बिहार बंद का असर सुबह से ही पटना जिले में देखने को मिला. मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में राजद कार्यकर्ताओं ने मनेर में विरोध प्रदर्शन किया. पटना के बस स्टैंड के पास भी राजद कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर टायर जलाकर इस नई नीति का विरोध किया. नवादा, बांका, दरभंगा, मधुबनी में भी लोग सड़कों पर उतरे और सड़क जाम कर प्रदर्शन किया. दरभंगा, बांका और पटना में रेलों का भी परिचालन बाधित किया गया.

राजद की बंदी को लेकर राज्यभर में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं. 350वें प्रकाशोत्सव के समापन समारोह ‘शुकराना समारोह’ को लेकर बाहर से आए सिख समुदाय के लोगों को कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए प्रशासन द्वारा खास ख्याल रखा जा रहा है.

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