बेशर्म अस्पताल, गर्भवती महिला को अंदर नहीं घुसने दिया तो बाहर ही करनी पड़ी डिलीवरी फिर…

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मैनपुरी अस्पताल के बाहर गर्भवती महिला
मैनपुरी अस्पताल के बाहर गर्भवती महिला

सुशासन और राम राज के वादों के इतर उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में अस्पताल कर्मियों के रवैये ने एक गर्भवती महिला को भर्ती नहीं किया। मजबूरी में परिवार वालों को उसकी डिलीवरी अस्पताल के बाहर ही कराई। अस्पताल की निर्दयता का ये चेहरा इंसानियत पर कंलक है।

देखिये पूरी वीडियो

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दरअसल, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भावुक हो जाएंगे और शायद रो भी दें। मंगलवार की रात यहां एक गरीब आदमी अपनी गर्भवती पत्नी को डिलीवरी के लिए लेकर आया। मगर डॉक्टर और नर्स ने उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया और उसे तुरंत ही सैफई के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल कर्मचारियों के इस व्यवहार के कारण बेबस महिला अस्पताल के गेट के बाहर ही रही और उसकी डिलीवरी बाहर ही कराई गई। बच्चा सही सलामत महिला के गर्भ से बाहर आ गया। मगर इसके बाद जो हुआ वह किसी पाप से कम नहीं है। मां के गर्भ से निकला नवजात बच्चा अस्पताल के गेट के सामने जमीन पर पड़ा रहा। उसे उठाने के लिए इस अस्पताल का कोई भी कर्मी सामने नहीं आया और बच्चा आधे घंटे तक तड़फता रहा।

अस्पताल के गलत बर्ताव की सताई हुई बेबस महिला परिवार के सदस्यों के साथ काफी देर तक लिपटी रही। इस दौरान अस्पताल का कोई भी कर्मचारी नहीं आया। इतना नहीं, नवजात बच्चे की नाल भी उसकी मां से जुड़ी रही। इस घटना से वाकई कई मायनों में मानवता शर्मसार होती है।

इसके बाद अस्पताल की एक महिला कर्मी कुछ देर पहले पैदा हुए नवजात बच्चे और उसकी मां के पास पहुंची। फिर उसने जमीन पर पड़े बच्चे की नाल काटी और उसे कपड़े में लपेट लिया। इस दौरान शुरू से लेकर अंत किसी व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। यह वीडियो तेजी वायरल हो रहा है और इसे लोग शेयर करके अस्पताल और डॉक्टरों पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों ने घटना पर अपना गुस्सा प्रकट किया है।

फिलहाल, पीड़ित महिला और नवजात बच्चे के साथ हुई ज्यादती के इस मामले में स्थानीय प्रशासन और योगी सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अस्पताल के इस गलत रवैये से उस गर्भवती महिला पर क्या गुजरी होगी, जिसे बिना किसी सरकारी मदद से अस्पताल के गेट के सामने डिलीवरी के लिए मजबूर होना पड़ा और अस्पताल के कई कर्मी केवल मूक दर्शक ही बने रहे।

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