बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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सोने-चांदी की चमक फीकी: वैश्विक तनाव और अमेरिकी फैसलों के इंतजार में निवेशकों ने खींचे हाथ

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के चलते सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, सप्ताह…

सोने-चांदी की चमक फीकी: वैश्विक तनाव और अमेरिकी फैसलों के इंतजार में निवेशकों ने खींचे हाथ
(फोटो: IANS)

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के चलते सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन इन वजहों से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई।

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बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में सोना 0.23% कमजोर होकर 4,133 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी में 1.03% की बड़ी गिरावट आई और यह 57.405 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। वैश्विक बाजार की इस कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

घरेलू बाजार में भी गिरावट

भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव 519 रुपये (0.35%) गिरकर 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,45,689 रुपये के निचले स्तर तक भी फिसल गया था। इसी तरह, चांदी की कीमत में भी भारी गिरावट आई और यह 2,267 रुपये (1.07%) टूटकर 2,09,218 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।

निवेशकों की नजरें फेडरल रिजर्व पर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान है कि फेडरल रिजर्व दिसंबर तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसकी संभावना 90% तक मानी जा रही है। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसी संपत्तियों में निवेश कम आकर्षक हो जाता है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

कीमतों पर असर डालने वाले अन्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण पिछले हफ्ते कच्चे तेल के दाम बढ़े थे, जिसका असर कमोडिटी बाजार पर पड़ा। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स में स्थिरता से भी सोने की मांग सीमित हुई है। आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, खासकर महंगाई के आंकड़ों से तय होगी, क्योंकि फेडरल रिजर्व इन्हीं के आधार पर अपने फैसले लेता है।

इनपुट: IANS

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