प्रशांत भूषण के 'सत्ता परिवर्तन' वाले बयान पर NDA का पलटवार, कहा- सड़क पर हंगामे से सरकारें नहीं बदलतीं
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के एक बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं। उनके इस बयान पर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय…
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के एक बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं। उनके इस बयान पर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला करार दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच सामने आया है।
गुरुवार को दिए अपने एक बयान में प्रशांत भूषण ने कहा था, "अगर सरकार को यह लगता है कि यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है तो हां, हम रिजीम चेंज करना चाहते हैं।" इसी टिप्पणी को लेकर एनडीए के घटक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
संवैधानिक तरीके से होता है सत्ता परिवर्तन: भाजपा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन की आड़ में विपक्ष का असली एजेंडा अब सामने आ गया है। उन्होंने कहा, "उनके मंसूबे साफ हो गए हैं। नेहा बोरा कहती हैं कि बांग्लादेश के मॉडल से इंस्पायर्ड हैं। प्रशांत भूषण कहते हैं कि यहां चेंज करना है।"
गुरु प्रकाश ने सत्ता परिवर्तन के संवैधानिक रास्ते पर ज़ोर देते हुए कहा, "रिजीम चेंज का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीका होता है। चुनाव लड़िए, उम्मीदवार उतारिए, मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाइए, अपनी नीति और नेतृत्व को स्पष्ट करिए। इस प्रकार से सड़क पर हंगामा करके सत्ता परिवर्तन नहीं होता।" उन्होंने आगे कहा कि देश संविधान की मर्यादा से चलता है, किसी की निजी इच्छाओं से नहीं।
जनादेश से मिलती है सत्ता: जदयू
वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी प्रशांत भूषण के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन आंदोलनों या खोखली धमकियों से संभव नहीं है। रंजन ने कहा, "जनता का जनादेश ही किसी को सत्ता में लाता है और किसी को सत्ता से बाहर करता है। जनादेश पाने के लिए जनता का भरोसा जीतना जरूरी है, जिसे कोई भी राजनीतिक दल अराजक तरीकों से हासिल नहीं कर सकता।"
उन्होंने आम आदमी पार्टी का उदाहरण देते हुए प्रशांत भूषण पर निशाना साधा। राजीव रंजन ने कहा, "उन्होंने 'आप' के साथ रहते हुए भी ऐसे ही दावे किए थे, लेकिन वे खुद भी उस पार्टी के साथ नहीं टिक पाए। 'आप' ने दिल्ली और पूरे देश में अपने कामों से 'वैकल्पिक राजनीति' पर जनता का भरोसा तोड़ दिया है।"
इनपुट: IANS



