शक्ति आभार की ।

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Power of gratitude
शक्ति आभार की ।

ना जाने कितनी ही शिकायतें ऊपर वाला रोज झेलता होगा, हर दिन हर किसी की कोई न कोई परेशानी और शिकायतें ऊपर वाले को झुंझलाती होंगी पर क्या कभी ऊपर वाले के प्रति आभार व्यक्त किया है जो उसने हमे आज तक दिया  है ? जो हमारे पास है उसपर खुश होने की बजाय अक्सर हम उन चीज़ों को लेकर दुखी रहते है परेशान रहते है, जो हमारे पास है ही नहीं । लेकिन क्या हम पूरे मन और भाव से आभार व्यक्त करते है , जो हमारे पास है ? क्या कभी किसी रोज सुबह उठते ही ईश्वर को शुक्रिया अदा करते है कि उसने हम जिंदगी का एक और खूबसूरत दिन बख्शा ? क्या हम अपने शरीर की सलामती और ठीक ढंग से काम कर रहे अंगो के प्रति अपना आभार व्यक्त करते है ?

‘आभार’ वह पुल  है जो हमे अशांति से शांति, नकरात्मक से सकारात्मक और नफरत से प्रेम की ओर ले जाता है। जितना आभार हम व्यक्त करते है उसके बदले उतना ही प्रेम हम पाते है ।
कोई भी हमारी जिंदगी को इतनी तेज़ी और नाटकीयता से विस्तार नहीं देगा, जितना की आभार व्यक्त करना । जहां आभार अभिव्यक्ति होती होती है, वहां उदासी, हताशा, घृणा, क्रोध जैसी चीज़ें नहीं होती ।अगर आप पूरी उम्र सिर्फ एक प्रार्थना “आपका धन्यवाद” करते है, तो यही काफी है। आप आभार के बिना ज्यादा शांति नहीं पा सकते, क्योंकि वह आभार ही है, जो हमे परम शांति से जोड़े रखता है ।

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