दिल्ली में विधानसभा चुनाव पर सियासी चाले शूरु,जाने पूरा मामला

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दिल्ली में विधानसभा चुनाव पर सियासी चाले शूरु,जाने पूरा मामला

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी जग होने शुरू हो गए है. इसी दौरान मोदी कैबिनेट की हुई बैठक में अवैध कॉलोनियों को नियम के अनुसार काम करने के लिए विधेयक को मंजूरी दी गई. अब ये विधेयक संसद के दोनों सदनों में मंजूरी के लिए जाएगा.

बता दें कि अवैध कॉलोनियों को रेग्युलराइज यानी की कॉलोनियों में नियम के अनुसार काम करने की मांग कई सालों से चल रही थी. अब जिसे पूरा करके बीजेपी ने अपनी पहली सियासी चाल चल दी है, जिसका सिधा असर विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा.

वहीं दूसरी और मोदी कैबिनेट के इस फैसले से केजरीवाल सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है दरअसल, आम आदमी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव शिक्षा और स्वास्थ्य के मसले पर लड़ना चाह रही है, जिसे लेकर उसने काफी काम किया. वह चाहे सरकारी स्कूलों को मॉर्डन बनाने का काम हो या फिर मोहल्ले में क्लिनिक खोलना को काम हो.

आम आदमी पार्टी के नेता इन क्षेत्रों में किए अपने कामों पर ही फोकस करते हैं. इसके साथ ही दिल्ली में 200 किलोवॉट तक बिजली भी मुफ्त की गई है, लेकिन चुनाव से दो महीने पहले बीजेपी ने अवैध कॉलोनियों को रेग्युलराइज करने का फैसला करके लोगों को बड़ी राहत दे दी है. इसी के साथ दिल्ली के वोटर्स के लिए एक अहम मुद्दे पर बाजी मारी है.

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बाद अब पानी की गुणवत्ता को लेकर भी बीजेपी ने केजरीवाल सरकार पर हमला बोला है. भारतीय मानक ब्यूरो की रिपोर्ट में दिल्ली की 11 जगहों से पाइप द्वार आने वाले पानी के नमूने लिए गए है, जिनमें ज्यादातर नमूने मानकों को पूरा करने में असफल रहे है. इस रिपोर्ट के बाद केजरीवाल सरकार पर हमले तेज हो गए है. केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने ट्वीट कर कहा है कि फ्री पानी के नाम पर अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता को जहर पिला रहे हैं. जिसके बाद अब इस मुद्दे पर जांच की जा रही है.

फिलहाल इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने आवास पर (RWA)आरडब्ल्यूए ऑफिस होल्डर्स के साथ-साथ अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि कई सरकारों ने इस दिशा में काम किया, लेकिन आधे-अधूरे मन से किया है. हमारी सरकार 2014 में आई, तब से हम दिल्ली में रहने वाले लोगों की मुश्किलों का हल निकालने के लिए नए तरीके खोज रहे थे.

वहीं दूसरी और सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि ‘हम लंबे समय से इसकी लड़ाई लड़ रहे थे. इस फैसले के लिए केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं. इस प्रस्ताव को हमने 2015 में भेजा था और उसके बाद से दिल्ली सरकार लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में थी.

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हालांकि मोदी कैबिनेट ने अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के विधेयक पर मुहर लगा दी. अब संसद में बिल पास होने के बाद कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक मिलेगा. इसके साथ ही सरकार ने दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 81 के सभी मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.