मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ब्रिक्स सम्मेलन: PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता, क्रेमलिन ने भारत को बताया 'रणनीतिक साझेदार'

रूस ने दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि की है। इस मुलाकात से ठीक पहले, समाचार एजेंसी IANS के…

ब्रिक्स सम्मेलन: PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता, क्रेमलिन ने भारत को बताया 'रणनीतिक साझेदार'
(फोटो: IANS)

रूस ने दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि की है। इस मुलाकात से ठीक पहले, समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, क्रेमलिन ने भारत को एक महत्वपूर्ण "रणनीतिक साझेदार" बताते हुए दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई को रेखांकित किया।

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रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को एक वर्चुअल बातचीत में बताया कि दोनों नेताओं के रिश्ते बेहद करीबी और व्यावहारिक हैं, जिससे वे वैश्विक एजेंडे और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा कर पाते हैं। उन्होंने कहा, "दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क बहुत अहम होंगे, खासकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक।"

ब्रिक्स की भूमिका और विस्तार

पेस्कोव ने ब्रिक्स को पारंपरिक संगठन के बजाय एक 'क्लब' के रूप में परिभाषित किया, जहाँ समान विचारधारा वाले देश वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करते हैं। उन्होंने कहा, "मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है। हमारे पास कोई चार्टर, नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है।" उन्होंने यह भी बताया कि रूस ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों—राजनीति व सुरक्षा, अर्थव्यवस्था व वित्त, और सांस्कृतिक व मानवीय संपर्क—के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

पेस्कोव ने 2024 में शुरू की गई 'ब्रिक्स पार्टनर कंट्री' श्रेणी की प्रशंसा की, जिसमें बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान जैसे देशों को शामिल किया गया है। इसे एक "बहुत ही सकारात्मक विकास" माना गया है।

आर्थिक सहयोग और प्रतिबंध

आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी जानकारी देते हुए पेस्कोव ने बताया कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच लगभग 90 प्रतिशत व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। यह बयान डॉलर के प्रभुत्व को लेकर चल रही वैश्विक बहस के बीच आया है। वहीं, भारत द्वारा रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक की संभावना पर क्रेमलिन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे "अवैध" करार दिया।

वैश्विक व्यवस्था और भारत-रूस संबंध

दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन सिर्फ सदस्य देशों की बैठक नहीं, बल्कि एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि एकध्रुवीय दुनिया ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है। क्रेमलिन प्रवक्ता ने भारत-रूस संबंधों को केवल तेल और रक्षा तक सीमित न बताते हुए कहा कि रूस, भारत में नए परमाणु संयंत्र के विकास में प्रगति की उम्मीद कर रहा है। यूक्रेन संकट पर भारत के प्रयासों का स्वागत करते हुए पेस्कोव ने कहा, "हम भारतीय प्रयासों का स्वागत करते हैं।"

इनपुट: IANS

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