बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: न्यायपालिका में दखलअंदाज़ी का आरोप लगाते हुए लाहौर हाईकोर्ट के जज ने दिया इस्तीफ़ा

पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था में कार्यपालिका के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर हाईकोर्ट (LHC) के जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी ने…

पाकिस्तान: न्यायपालिका में दखलअंदाज़ी का आरोप लगाते हुए लाहौर हाईकोर्ट के जज ने दिया इस्तीफ़ा
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था में कार्यपालिका के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर हाईकोर्ट (LHC) के जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी ने बुधवार को अपने पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि उनका "जमीर अब इस पद पर बने रहने की इजाजत नहीं देता।"

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राष्ट्रपति को भेजे अपने त्यागपत्र में जस्टिस कयानी ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक संशोधनों के ज़रिए न्यायपालिका पर कार्यपालिका का नियंत्रण बढ़ता जा रहा है, जो अब जजों की नियुक्ति और तबादलों तक पहुंच गया है। उनका कार्यकाल 10 फरवरी, 2032 तक था, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ने का फैसला किया।

इस्तीफ़े की वजह और चिंताएं

डॉन मीडिया के हवाले से, जस्टिस कयानी ने अपने पत्र में कहा, "मेरे आकलन के अनुसार, इस तरह के हस्तक्षेप ने न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जनता के भरोसे को बुरी तरह कम कर दिया है।" उन्होंने 26वें और 27वें संवैधानिक संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन बदलावों ने उच्च न्यायालयों की संस्थागत अखंडता को कमज़ोर किया है।

जस्टिस कयानी ने न्याय मांगने वाले आम आदमी की दुर्दशा को सबसे चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, "न्याय प्रणाली का मुख्य पक्षकार वही है, लेकिन उसकी तकलीफें लगातार बढ़ती जा रही हैं।" उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि न्याय मांगने वालों की ज़रूरतों को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है।

करियर और भविष्य की योजना

अपने कार्यकाल के दौरान 23,000 से अधिक मामलों का निपटारा करने वाले जस्टिस कयानी ने हमेशा संविधान के सम्मान और मौलिक अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी। इस्तीफे को एक "कठिन फैसला" बताते हुए उन्होंने कहा कि वे अब वकालत में लौटकर लोगों की सेवा करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना जारी रखेंगे। इस्लामाबाद के रहने वाले जस्टिस कयानी अप्रैल में लाहौर हाईकोर्ट में स्थानांतरित होने से पहले इस्लामाबाद हाईकोर्ट (IHC) में कार्यरत थे।

इनपुट: IANS

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