Opinion: लालू परिवार का CBI-ED से पुराना नाता, आज के अपनों की लगाई आग में झुलस रहे तेजस्वी-मीसा

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Opinion: लालू परिवार का CBI-ED से पुराना नाता, आज के अपनों की लगाई आग में झुलस रहे तेजस्वी-मीसा

Opinion: लालू परिवार का CBI-ED से पुराना नाता, आज के अपनों की लगाई आग में झुलस रहे तेजस्वी-मीसा


जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू परिवार को जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा हैं। लेकिन ये नया नहीं, बल्कि लालू परिवार का सीबीआई से पुराना नाता रहा हैं। सीबीआई ने चारा घोटाले के कई मामले में लालू यादव को स्पेशल कोर्ट से सजा दिलाई थी।

 

हाइलाइट्स

  • ललन सिंह अब लालू परिवार को दे रहे हैं क्लीन चिट
  • सेंट्रल जांच एजेंसियों पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
  • सीबीआई ने ही लालू को चारा घोटाले में सजा दिलाई
ओमप्रकाश अश्क, पटना: लालू यादव के परिवार को सीबीआई, ईडी और इकम टैक्स महकमे से कब छुटकारा मिलेगा, कह पाना मुश्किल है। सीबीआई ने ही लालू यादव को चारा घोटाले में सजा के अंजाम तक पहुंचाया था। अब उनके बेटे-बेटियां और पत्नी इन सेंट्रल जांच एजेंसियों का सामना कर रहे हैं। इसी महीने लालू, उनकी पत्नी राबड़ी और दो बेटियों- मीसा भारती और रोहिणी से सीबीआई ने दिल्ली में पूछताछ की थी। उसके पहले ईडी ने राबड़ी देवी के पटना स्थित आवास पर भी दबिश दी थी। लालू परिवार के खिलाफ नया मामला उनके रेल मंत्री रहते नौकरी के लिए जमीन लेने का है। सीबीआई ने शनिवार को लालू के बेटे और बिहार के डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव से दिल्ली में पूछताछ की। इसी दिन बेटी मीसा भारती से भी ईडी ने पूछताछ की। दरअसल यह मामला बिहार में बने महागठबंधन के दूसरे बड़े घटक दल जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने 2008 में पीएम आफिस (पीएमओ) के संज्ञान में दिया था। हालांकि लालू यादव की पार्टी आरजेडी के साथ जेडीयू नेता नीतीश कुमार बिहार में अब सरकार चला रहे हैं। पिछले ही साल एनडीए छोड़ कर नीतीश कुमार आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के सहयोग से सीएम बने।

ललन सिंह अब लालू परिवार को क्लीन चिट दे रहे

बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने अपनी किताब लालू लीला में नौकरी के लिए जमीन घोटाले का जिक्र किया है। उन्होंने बताया है कि ललन सिंह ने पीएमओ को जो कागजात सौंपे थे, उसी के आधार पर उन्होंने अपनी किताब में इसका जिक्र किया है। ललन सिंह भी सुशील मोदी के इस खुलासे से सीधे-सीधे इनकार नहीं करते। वह इतना ही कहते हैं कि मामला काफी पुराना है और इसकी पहले भी दो बार जांच हो चुकी है। सीबीआई ने मामले को रफा-दफा कर दिया था। अब चूंकि बिहार में आरजेडी के सहयोग से महागठबंधन की सरकार बन गयी है, इसलिए बीजेपी इस मामले को उठा रही है। यह भी दिलचस्प है कि ललन सिंह बहैसियत जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीबीआई, ईडी और आईटी को केंद्र की बीजेपी सरकार के तोते बता रहे हैं। लेकिन जब पीएम नरेंद्र मोदी को विपक्ष के 9 नेताओं ने इन एजेंसियों के दुरुपयोग के संदर्भ में पत्र लिखा तो जेडीयू के किसी नेता ने उस पर दस्तखत नहीं किये। इतना ही नहीं, जब 14 विपक्षी दलों ने सेंट्रल एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो उससे भी ललन सिंह की पार्टी अलग रही। अलबत्ता आरजेडी नेता के तौर पर तेजस्वी यादव जरूर दोनों मौकों पर विपक्षी दलों के साथ रहे। भोजपुरी अंचल में इस आशय को लेकर एक कहावत प्रचलित है- अगिया लगाय बहू बर तर खाड़ (घर में आग लगा कर बहू खुद घर से बाहर बट वृक्ष के नीचे खड़ी हो गयी)। आज लालू परिवार इस नयी मुसीबत में अगर उलझा-फंसा है तो इसके कारक ललन सिंह ही हैं। यानी जो आज लालू परिवार के अपने बन रहे हैं, आग उन्होंने ही लगायी थी।

सेंट्रल जांच एजेंसियों पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

वैसे सेंट्रल जांच एजेंसियों पर पहली बार सवाल नहीं उठ रहे। पहले भी इनकी आलोचना होती रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई को लेकर एक समय तल्ख टिप्पणी की थी। इसे सरकारी तोता कहा था। यह बात जरूर है कि 2014 में केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी, तब से सीबीआई और ईडी अधिक एक्टिव हो गये हैं। हाल के दिनों में ईडी और सीबीआई के लगातार छापे पड़ते रहे हैं। यह अलग बात है कि ईडी के ज्यादातर रेड विपक्षी नेताओं के यहां ही पड़े हैं। लेकिन उसके परिणाम भी तो सामने आए हैं। विपक्ष का दावा है कि 95 प्रतिशत ईडी के छापे गैर भाजपा नेताओं के यहां पड़े हैं। इसके साथ एक सत्य यह भी है कि गलत ढंग से अर्जित लगभग नकद सहित करीब एक लाख करोड़ की संपत्ति ईडी ने जब्त की है। 96 प्रतिशत मामलों में ईडी ने ऐसे लोगों को सजा भी दिलायी।

सीबीआई ने ही लालू को चारा घोटाले में सजा दिलाई

जो लोग यह आरोप लगाते हैं कि केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार है, इसलिए लालू यादव के परिवार को तंग किया जा रहा है। ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि सीबीआई ने ही लालू यादव को सजा दिलायी थी। उसकी ही जांच में लालू चारा घोटाले में दोषी ठहराये गये थे। मान भी लें कि लालू परिवार के खिलाफ जान-बूझ कर सेंट्रल एजेंसियों को केंद्र सरकार ने लगा दिया है तो बचाव के लिए उनके पास कोर्ट तो है न। जांच में सेंट्रल एजेंसियां बेवजह दोषी ठहरा देती हैं तो कोर्ट पर भरोसा रखना चाहिए। अगर बड़े नेताओं को ही अदालतों पर भरोसा नहीं होगा तो आम आदमी के बीच क्या और कैसा संदेश जाएगा।

ईडी की मानें तो 2.98प्रतिशत केस ही सांसदों-विधायकों के हैं

हाल ही में ईडी ने 31 जनवरी 2023 तक की अपनी रिपोर्ट जारी की है। ईडी ने बताया है कि तीन कानून- मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, भगौड़े आर्थिक अपराध के तहत दर्ज कुल मामलों में 2.98प्रतिशत ही सांसदों-विधायकों से संबद्ध हैं। इनमें लालू परिवार के अलावा सोनिया गांधी, राहुल गांधी जैसे वर्तमान या पूर्व सांसद, पूर्व विधायक या दूसरे जनप्रतिनिधि शामिल हैं। ईडी की रिपोर्ट बताती है कि ऐसे मामलों में 96प्रतिशत आरोपियों पर दोष सिद्ध हुए हैं। उन्हें सजा भी मिलती रही है। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि सांसद, विधायकों पर ईडी की जांच में सजा की दर सबसे अधिक 96प्रतिशत है।

2002 में पीएमएलए के तहत मिला था जांच का अधिकार

वर्ष 2002 में धन शोधन निवारण अधिनियम बना था। इसके प्रावधानों के तहत ईडी ने 2005 से काम करना आरंभ किया। इसमें ईडी को अधिकार दिया गया कि जांच के लिए अभियुक्तों को वह बुला सकता है, गिरफ्तार कर सकता है और उनकी संपत्ति भी कुर्क कर सकता है। अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार भी ईडी को पीएमएलए में दिया गया है। इसी अधिकार के तहत ईडी ने 31 जनवरी 2023 तक आर्थिक अपराध से जुड़ीं 5,906 शिकायतें दर्ज की हैं। इनमें 176 मामले ही वर्तमान और पूर्व सांसदों, विधायकों और एमएलसी के खिलाफ दर्ज हैं। पीएमएलए के तहत 1,142 अभियोजन रपट या चार्जशीट दायर हुए हैं। 513 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पीएमएलए के तहत 25 मामलों में सुनवाई हुई, जिनमें 24 मामलों में सजा भी हो चुकी है।

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