Opinion: काश! पापा की बात मान जाती साक्षी, अब इस पिता का दर्द कौन समझेगा

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Opinion: काश! पापा की बात मान जाती साक्षी, अब इस पिता का दर्द कौन समझेगा

Opinion: काश! पापा की बात मान जाती साक्षी, अब इस पिता का दर्द कौन समझेगा

नई दिल्ली: मैं फांसी चाहती हूं, जैसे मेरी लड़की गई उसको भी जाना चाहिए… चेहरे पर कपड़ा डालकर कैमरे के सामने बोलने वाली साक्षी की मां का दर्द महसूस कीजिए। पिता का भी चेहरा दिखाई नहीं दिया और वह मीडिया के सामने बोले, ‘जैसे उसने दरिंदगी से मेरी बेटी को बेरहमी से मारा है, वैसे उसको फांसी की सजा होनी चाहिए ताकि आगे कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे।’ यह कहते उस पिता की आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं। गला भर आता है। घर में भीड़भाड़ है। वह अपना दर्द सिर झुकाकर छिपाने की कोशिश करते हैं। हाय रे बदनसीबी, जिस जल्लाद ने एक नाबालिग बच्ची के शरीर को चाकू से गोद दिया, वह हत्या की वजह बता रहा है और इधर मां-बाप की पीड़ा हृदयविदारक है। पिता से जब पूछा जाता है कि आर्थिक मदद… वह कह पड़ते हैं कि कोई बात नहीं, मैं मजदूर आदमी हूं। उन्होंने जो किया ठीक किया। दरअसल, भाजपा सांसद हंसराज हंस ने एक लाख रुपये का चेक परिवार को सौंपा है और केजरीवाल सरकार ने 10 लाख रुपये देने की घोषणा की है। ऐसे समय में मीडिया ही नहीं, आम लोग भी चाहते हैं कि परिवार की जितनी हो सके मदद की जाए। लेकिन पिता का साफ तौर पर कहना था कि मैं मजदूर भले हूं, लेकिन पैसे का लालच नहीं है। मेरी बेटी का हत्यारा फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। इन सबके बीच शायद आज भी उस पिता को एक बात सोने नहीं देती और जीवनभर उन्हें पछतावा रहेगा।

साक्षी 10 दिन से नीतू के पास थी। 28 मई को नीतू ने ही मुझे बताया कि साहिल ने उसे चाकू और पत्थर से मार दिया है। एक दिन पहले साहिल ने साक्षी से झगड़ा किया था। जब मैं नीतू के साथ बी ब्लॉक (शाहबाद डेरी) पहुंचा तो मेरी बेटी पड़ी थी। उसके सिर पर घाव थे। खून ही खून था।

साक्षी के पिता

हां, ऐसी बात जो शायद साक्षी मान जाती तो आज वह जिंदा होती। एफआईआर में दर्ज कराए बयान में साक्षी के पिता ने बताया है कि उनकी बेटी साहिल को पहले से जानती थी। शायद एक साल या उससे ज्यादा समय से वे एक दूसरे को जानते थे। वह अक्सर साहिल का नाम लेती थी। तब पिता ने उसे समझाया था कि बेटी तुम अभी छोटी हो। अभी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दो। लेकिन 16 साल की साक्षी को जब भी पिता यह सलाह देते, वह उसे गलत समझ लेती थी। घरवाले उसे साहिल से दूर रहने के लिए कहते तो वह गुस्सा हो जाती और अपने दोस्त के घर चली जाया करती थी। साक्षी का परिवार साहिल के खिलाफ था लेकिन ये बात साक्षी को समझ में नहीं आई। आखिर में साहिल ने जो किया, वह देख पूरा देश सन्न है।

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जिस रात उसकी हत्या की गई, उसके 10 दिन पहले से वह अपनी सहेली के घर रह रही थी। यह घटना आज के समाज के बदलते नजरिए के साथ कम उम्र के बच्चों पर मोबाइल-इंटरनेट के बढ़ते असर, रील और रियल लाइफ में फर्क न कर पाने का अभाव भी बताता है। कोरोना काल में न चाहते हुए भी मां-बाप को बच्चों के हाथ में मोबाइल देना पड़ा। वे न केवल व्हाट्सअप बल्कि इंस्टाग्राम पर भी आ गए। 12-14 साल की उम्र में बच्चे पढ़ाई के अलावा खेलकूद में बिजी रहते हैं। दौड़ते हैं, भागते हैं। दोस्तों के साथ पार्क में टाइम बिताते हैं लेकिन आप भी अपने घर या आसपास देखिए तो अब बच्चे कमरे के अंदर मोबाइल से ही चिपके रहना चाहते हैं। उनके दोस्तों की चौपाल भी ऑनलाइन लगती है। वे इंस्टाग्राम पर चैट करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि घरवाले देख नहीं सकेंगे। कॉल भी ऑनलाइन होती है। साक्षी केस के बाद अब इन चीजों की तरफ बहुत से लोग सोचने लगे हैं।

जी हां, पुलिस को जांच में पता चला है कि नाबालिग लड़की साक्षी इंस्टाग्राम पर ही साहिल से बातचीत करती थी। साक्षी के पास अपना स्मार्टफोन नहीं था। जाहिर सी बात है कि उसके पिता मजदूर थे और 8-10 हजार रुपये दिहाड़ी मजदूर या आम आदमी के लिए कोई छोटी रकम नहीं होती है। साक्षी अपनी सहेली नीतू का फोन इस्तेमाल करने लगी। नीतू के इंस्टाग्राम अकाउंट से वह साहिल से बात करने लगी।

अब पुलिस ने नीतू का फोन कब्जे में लिया है। जांच की जा रही है कि दोनों में क्या बातचीत हुई थी। टीवी रिपोर्टों में साक्षी-साहिल के इंस्टा चैट की डीटेल भी सामने आई है। जल्द ही पुलिस साक्षी हत्याकांड की सारी कड़ियां जोड़ लेगी, लेकिन साक्षी फिर कभी अपने पिता से नहीं मिल पाएगी। पिता को जीवनभर इस दर्द के साथ रहना होगा कि काश, बेटी ने वो बात मान ली होती। यह घटना हर मां-बाप के लिए सबक है। बच्चों को सही रास्ता दिखाना जरूरी है। सोशल मीडिया पर लाइक्स पाने के लिए सारी उम्र पड़ी है।

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