OP Rajbhar: अधर में सपा गठबंधन का भविष्य, राजभर के बगावती तेवर बढ़ाएंगे अखिलेश की बेचैनी

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OP Rajbhar: अधर में सपा गठबंधन का भविष्य, राजभर के बगावती तेवर बढ़ाएंगे अखिलेश की बेचैनी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में एक बार फिर समाजवादी पार्टी गठबंधन (Samajwadi Party Alliance) के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। यूपी चुनाव 2022 के बाद सबसे पहले महान दल के गठबंधन से बाहर होने के बाद अब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के तेवर बदले हुए हैं। सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (SBSP) ने यूपी चुनाव के रिजल्ट के बाद से ही तीखे तेवर अपना लिए थे। अब राष्ट्रपति चुनाव (President Election) में उन्होंने सपा गठबंधन से अलग होकर अपना रुख अपना लिया है। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ अब केवल राष्ट्रीय लोक दल ही खड़ी नजर आ रही है। यूपी में कांग्रेस को छोड़कर अन्य विपक्षी दल एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में खड़े दिख रहे हैं।

विपक्षी दलों की ओर से यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किया गया। इसके बाद एनडीए ने द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा राजनीतिक खेल कर दिया। तृणमूल कांग्रेस नेता से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में उतरने वाले यशवंत सिन्हा को बंगाल में ही चुनाव प्रचार करने से रोक दिया गया। वहीं, द्रौपदी मुर्मू ने अपने पक्ष में देश के तमाम राज्यों में घूमकर प्रचार किया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी यशवंत सिन्हा को प्रचार करने से रोककर खुद का एक्सपोज करने से बचती दिखी हैं। वे सीधे तौर पर राष्ट्रपति पद पर खड़ी एक आदिवासी समाज की महिला उम्मीदवार का विरोध करता नहीं दिखाना चाहती हैं। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही ममता बनर्जी की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने वाले उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा कर दी थी।

विपक्षी उम्मीदवार के समर्थन में नहीं बसपा
यूपी की अगर बात करें तो बहुजन समाज पार्टी भी विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन नहीं कर रही है। मायावती ने आदिवासी समाज की महिला उम्मीदवार का समर्थन करने का ऐलान कर दिया। वहीं, सपा गठबंधन के सहयोगी सुभासपा भी अब एनडीए उम्मीदवार के समर्थन में खड़ी हो गई है। ऐसे में द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में एनडीए के 66 सांसद और 273 विधायकों के अलावा बसपा के 10 सांसद और एक विधायक एवं सुभासपा के छह विधायकों का समर्थन मिलता दिख रहा है। यशवंत सिन्हा के पक्ष में सपा गठबंधन के तीन सांसद एवं 118 विधायक और कांग्रेस के एक सांसद और 2 विधायक का समर्थन यूपी से मिलता दिख रहा है। सपा के एक विधायक शिवपाल यादव पहले ही एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा कर चुके हैं।

यूपी चुनाव में छोटे दलों के साथ डाला था बड़ा प्रभाव
यूपी चुनाव 2022 में अखिलेश यादव ने छोटे दलों के साथ गठबंधन कर बड़ा प्रभाव डाला था। महान दल, सुभासपा, अपना दल कमेराबादी और राष्ट्रीय लोक दल को साथ लेकर समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली 47 सीटों से करीब ढाई गुना अधिक 111 सीटों तक का सफर तय कर लिया। उनके गठबंधन सहयोगियों को इसका फायदा मिला। माना जा रहा था कि छोटे-छोटे दल सपा के साथ मिलकर भविष्य की राजनीति में भी आगे बढ़ेंगे। लोकसभा चुनाव 2024 में इन दलों के साथ उतर कर भाजपा को कड़ी टक्कर देने की रणनीति थी, लेकिन अब बिखराव होता दिख रहा है।

गठबंधन पर राजभर का दो टूक
राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने के ऐलान के साथ राजभर ने अखिलेश यादव के साथ गठबंधन मामले में दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब तक गठबंधन चलता है, बने रहेंगे। जब उनसे पूछा गया कि आपको किसी बैठक में बुलाया नहीं जा रहा है। क्या आप निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं। इस पर राजभर ने तल्ख तेवर दिखाते हुए कहा कि किसकी हिम्मत है कि मुझे निकाल दे। अखिलेश यादव पर नवरत्नों से घिरे रहने का आरोप लगाते हुए राजभर ने कहा कि वे ही उन्हें ले डूबेंगे।

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राजभर ने सपा नेताओं की ओर से फॉर्चूनर गाड़ी अखिलेश यादव की ओर से दिए जाने का मामला उठाए जाने पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं फॉर्चूनर से चलता ही नहीं हूं। उस पर कमर में दर्द होने लगता है। मेरे पास दो इनोवा गाड़ी है। मैं उसी से चलता हूं। राजभर ने कहा कि उप चुनाव के दौरान हम आजमगढ़ और रामपुर में चुनाव प्रचार करने गए। लोगों ने देखा ही होगा। हालांकि, अभी उन्होंने अखिलेश के साथ गठबंधन बने रहने की बात कही है।

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