शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
अपराध

ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर फ्रॉड: ED ने 5 शहरों में की छापेमारी, दुबई से जुड़े तार

देश में बड़े पैमाने पर चल रहे एक ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिंडिकेट दुबई में…

ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर फ्रॉड: ED ने 5 शहरों में की छापेमारी, दुबई से जुड़े तार
(फोटो: IANS)

देश में बड़े पैमाने पर चल रहे एक ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिंडिकेट दुबई में बैठे लोगों के निर्देशों पर काम कर रहा था और इसने पीड़ितों से ठगी गई रकम को भारत से बाहर भेजने के लिए कई जटिल तरीकों का इस्तेमाल किया।

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ईडी के मुंबई जोन-2 ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 13 अक्टूबर को यह कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद जैसे पांच शहरों में करीब 20 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत जब्त किए गए, साथ ही कई बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश भी दिया गया।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

यह पूरा सिंडिकेट ‘ऑल पैनल एक्सचेंज’ और ‘एमजीएम91’ जैसे ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। पीड़ितों को इन प्लेटफॉर्म पर पैसे जमा करने के लिए उकसाया जाता और फिर उनके साथ धोखाधड़ी की जाती थी। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को कई मुखौटा (शेल) कंपनियों और म्यूल बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि कानून की पकड़ से बचा जा सके।

एजेंसी के अनुसार, इस पूरे गोरखधंधे के केंद्र में पुणे स्थित एक कंपनी ‘एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड’ थी, जिसे राम यू. रामधानी ने स्थापित किया था। इस कंपनी ने ‘आईपैसा’ नाम का एक पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाया था, जिसने ऑनलाइन सट्टेबाजी और धोखाधड़ी करने वाले ऑपरेटरों के लिए 200 से ज्यादा शेल कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया था।

ठगी के पैसे को विदेश भेजने के तीन रास्ते

ईडी की जांच में पता चला है कि अपराध से कमाई गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

  • ओवरइनवॉइसिंग: व्यापारिक लेन-देन दिखाकर फर्जी बिलों (ओवरइनवॉइसिंग) के जरिए पैसा विदेश भेजा जाता था।
  • नकद निकासी: कृषि उपज विपणन समिति (APMC) की इकाइयों के नाम पर खोले गए खातों से बड़ी मात्रा में नकदी निकाली जाती थी।
  • क्रिप्टोकरेंसी: ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर भारत से बाहर भेज दिया जाता था।

इस पूरे नेटवर्क को कुछ सहकारी बैंकों से भी मदद मिल रही थी, जिनके बैंकिंग ढांचे का इस्तेमाल अवैध रकम को जमा करने और उसे कई स्तरों पर घुमाने के लिए किया गया।

मामले में अब तक की कार्रवाई

यह इस मामले में ईडी की पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी एजेंसी पुणे, मुंबई और बेंगलुरु में कई ठिकानों पर तलाशी ले चुकी है। इस सिंडिकेट के मुख्य आरोपी राम यू. रामधानी को ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। ईडी ने कहा है कि इस अवैध वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए आगे भी जांच जारी रहेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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