एक अनोखा मंदिर जो भक्तों को दिन में एक बार दर्शन देकर डूब जाता है समुद्र में, हैं और भी कई खासियत

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नई दिल्ली: भारत की संस्कृति बहुआयामी है. हमारी भारतीय संस्कृति उसकी परंपराओं, भाषाओँ, हस्तशिल्पों, मूल्यों, कलाओं और धर्म आदि से हम कई सदियों से प्रचलित है. वहीं बात की जाए हिंदू संस्कृति और धर्म की तो जाहिर सी बात है कि देवी-देवताओं का भी जिक्र होता है. भारत देश में जितने भी देवी-देवताओं को पूजा जाता है उनकी अपनी ही खासियत है.

आज हम आपको हिंदू धर्म से जुड़ी ऐसी ही एक खास चीज के बारे में जानकारी देंगे जिसके बारे में अपने पहले नहीं सुना होगा. यूं तो आप ने कई मंदिरों के दर्शन किए होंगे और उन मंदिरों की मान्यता भी खूब सुनी होगी. लेकिन क्या अपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जो दिन में एक बार भक्तों को अपने दर्शन देकर समुद्र में वापिस डूब जाता है. जी हां, आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में कुछ बताएंगे.

गुजरात के बढ़ोदरा में भगवान शिव का एक ऐसा अद्भुत मंदिर है जो देखते ही देखते समुद्र में गायब हो जाता है. इसी खूबी के कारण यह पुरे विश्व में प्रसिद्ध है. इस दर्शाय को देखने के लिए भोले के भक्त इस मंदिर के दर्शन के लिए दौड़ जाते है. तो आइए, जानते हैं इस मंदिर के बारे में विस्तार से…

भगवान शिव का यह मंदिर स्तंभेश्वर महादेव के नाम से भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है

आपको बता दें कि भगवान शिव का यह मंदिर स्तंभेश्वर महादेव के नाम से भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है. इस मंदिर की खोज आज से 150 साल पहले की गई थी. इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग चार फीट ऊंचा ओर चार फीट के व्यास का है. इस शिवलिंग के दर्शन दिन में सिर्फ एक बार ही हो सकते है. बाकी समय में यह मंदिर समुद्र में गायब रहता है.

दरअसल, दिन में कम से कम दो बार समुद्र का जल स्तर इतना अधिक हो जाता है कि मंदिर पूरी तरह से समुद्र में डूब जाता है. जब कुछ समय बाद जल का स्तर कम हो जाता है तो मंदिर दोबारा दिखने लग जाता है. यह चीज हर रोज सुबह और शाम को होती है. इस मंदिर में आने वाले भक्तों को मुख्य रूप से पर्चे बांटे जाते है, जिनमें ज्वारभाटा के आने का समय अलग से लिखा होता है.

कैसे पहुंचे यहां

शिवजी का यह प्रसिद्ध मंदिर जो स्तंभेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है, वह गुजरात के बढ़ोदरा से करीब 40 किलोमीटर दूर जंबूसर तहसील में है. यह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. इस जगह में आने के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है.