ऐसा हुआ तो 2019 चुनाव में हारेंगे मोदी

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प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी लगातार कहते रहे हैं कि देश का काफी समय और पैसा राज्यों और केंद्र के अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव में खर्च हो जाता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि राज्यों का चुनाव और केंद्र में सरकार चुनने के लिए मतदान एकसाथ होने चाहिए।

यदि प्रधानमंत्री मोदी की इस सलाह को मान भी लिया जाए तो इससे सबसे ज्यादा पशोपेश में और नुकसान में वो खुद रहने वाले हैं। इसकी एकमात्र वजह है एक चेहरे वाली राजनीति और प्रचार व्यवस्था।

मोदी अपनी पार्टी का चेहरा हैं। राज्यों के मुद्दों से लेकर केंद्र की नीतियों तक हर चुनाव में मोदी ही विपक्षियों को टक्कर देते हैं। अगर राज्यों और केंद्र के चुनाव एकसाथ करवाने की कोशिश होती है तो मोदी को  हजारों की तादाद में रैलियां और जनसभाएं देश के सभी हिस्सों में जाकर करनी पड़ेगी।

याद कीजिए कि कैसे वो बिहार के एक-एक जिले में पहुंच रहे थे। उत्तर प्रदेश में वो रोडशो करते नजर आए। बनारस में डेरा डालकर बैठे। महाराष्ट्र में अलग-अलग हिस्से के लोगों को उनके मुद्दों पर समझाते और सहमत करवाते नजर आए।

ऐसा अगर सभी राज्यों और केंद्र सरकार के चुनाव के लिए करना पड़े तो अकेले मोदी से यह संभव नहीं हो पाएगा। फिर प्रधानमंत्री रहते हुए तो यह उनके लिए नामुमकिन जैसा होगा। सरकार का कामकाज और इतने सारे राज्यों का दौरा करने में मोदी अपनी ही पार्टी और प्रचार को वो समय और महत्व नहीं दे पाएंगे जो वो अभी दे पा रहे हैं।

ऐसे में मोदी का अपना ही विचार उनके लिए सबसे महंगा साबित हो सकता है और 2019 में उनके हार की भी वजह बन सकती है।

 

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