तेल आयात और खपत में कमी देश में आर्थिक मंदी का संकेत है

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भारत में तेल आयात में मंद वृद्धि देश में लंबी आर्थिक सुस्ती का संकेत है. बता दें कि इस साल तेल आयात में 3.5 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है. भारत को अपनी तेल की जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करना पड़ता है, ऐसे में तेल का आयात कम होने से मांग और खपत में सुस्ती रहने का संकेत मिलता है.

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पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के अनुसार, देश का तेल आयात वित्त वर्ष 2019 के 22.7 करोड़ टन के मुकाबले 2020 में 23.3 करोड़ टन रह सकता है. तेल आयात की दर सुस्त होना सरकार के खजाने के लिए अच्छी खबर है लेकिन कच्चे तेल का आयात कम होने से भारतीय तेलशोधक कारखानों को कम तेल मिलेगा और पेट्रोल, डीजल व विमान ईंधन की खपत में कमी आएगी.

बता दें कि वर्ष 2018 की शुरुआत में सुधार के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में फिर 2018-19 की तीसरी तिमाही में सुस्ती देखी गई और सकल घरेलू उत्पाद विकास दर घटकर 6.6 फीसदी पर आ गई. अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती के कारण वित्त वर्ष 2019  में आर्थिक विकास दर अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर सात फीसदी कर दिया गया.

योजना आयोग के एक पूर्व सदस्य ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा, “तेल आयात की दर कम होने से भारत के तेल आयात बिल में कटौती होगी और इससे चालू खाता घाटा का प्रबंधन करने में मदद मिलेगी लेकिन यह तेल के मौजूदा दाम का एक कारण होगा। अगर खाड़ी देशों में तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल आता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार और सुस्त पड़ सकती है.”