तो अब याद आई सरकार को शिक्षा-व्यवस्था की!

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तो अब याद आई सरकार को शिक्षा-व्यवस्था की!
तो अब याद आई सरकार को शिक्षा-व्यवस्था की!

देश का भविष्य कैसा होगा, इसकी नींव शिक्षा-व्यवस्था से ही डलती है, लेकिन आजकल शिक्षा-व्यवस्था का लाचार होना, यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। देश के कई ऐसे राज्य है, जहाँ अभी सही और सुचारू शिक्षा व्यवस्था क्या होती है, इसका भी पता नहीं है। शिक्षा के नाम पर जमाखोरी, शिक्षकों का पढ़ाने से ध्यान हटना, शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार कमी का आना, इस तरह के तमाम सवाल सरकार को कठघरें खड़ा करती है। आइये जानते है कि किस राज्य की सरकार नींद से जगी है, शिक्षा को सुधारने के लिए?

आपको बता दें कि एमपी के गुना जिले में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है जिसकी वजह से जिले के छात्र दूसरे राज्यों में जाने के लिए मजबूर है। साथ ही आपको यह भी बता दें कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का हाल तो ये है कि टीचर स्कूल में दो से तीन घंटे देरी से आते हैं, और पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते है और घर चले जाते है। इन खबरों पर अगर गौर किया जाए तो साफ जाहिर होता है कि राज्य में शिक्षा बस मजाक बन कर रह गया है।

एक्शन में आई सरकार….
शिक्षा की हालत देखते हुए सरकार ने आदेश जारी कर कलेक्टरों को इसकी जिम्मेदारी दी है। आपको बता दें कि सबसे ज्यादा खराब हालात ग्रामीण स्कूलों के हैं, जहां छात्रों को संसाधनों की कमी के बीच पढ़ाया जा रहा है। यहाँ के स्कूल में न सिर्फ संसाधन की कमी है बल्कि टीचर्स की कमी भी नजर आती है। प्रदेश में शिक्षा की हालत को सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने इसकी कमान अब जिलाअधिकारियों को सौंपी है।

टीचर्स पर होगी कार्रवाई….
आपको बता दें कि एमपी सरकार जल्द ही केवल वेतन बटोरने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। साथ ही आपको बता दें कि प्रदेश की सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कई निर्देश जारी किये है।

बहरहाल, राज्य सरकार की ये कोशिश कितनी सफल रहती है, यह तो खैर वक्त ही बताएगा, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि शिक्षा विकास की पहली सीढ़ी होती है, इसकी नींव मजबूत होनी चाहिए न कि खोखली।

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