न्यूज़ीलैंड चुनाव: नेशनल और लेबर पार्टियों में कांटे की टक्कर, छोटे दल बन सकते हैं 'किंगमेकर'
न्यूज़ीलैंड के आम चुनाव में सत्ताधारी नेशनल पार्टी और मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी के बीच बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। शनिवार, 7 नवंबर को मतदान संपन्न होने के बाद शुरू हुई मतगणना के शुरुआती…
न्यूज़ीलैंड के आम चुनाव में सत्ताधारी नेशनल पार्टी और मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी के बीच बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। शनिवार, 7 नवंबर को मतदान संपन्न होने के बाद शुरू हुई मतगणना के शुरुआती रुझानों में दोनों प्रमुख दलों में से किसी को भी स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 35% वोटों की गिनती के बाद दोनों पार्टियों को मिले वोटों में मामूली अंतर है, जिससे सरकार बनाने में छोटी पार्टियों की भूमिका अहम हो गई है।
शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, लेबर पार्टी को 29.9% और नेशनल पार्टी को 29.4% वोट मिले हैं। यह रुझान लगातार बदल रहे हैं, कभी एक पार्टी आगे होती है तो कभी दूसरी। न्यूज़ीलैंड के चुनाव आयोग ने आधिकारिक नतीजों की घोषणा के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की है, जिसमें विदेश में डाले गए और विशेष मतों की गिनती भी शामिल होगी।
छोटे दलों का प्रदर्शन और सरकार का समीकरण
इस चुनाव में छोटे दलों ने भी अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई है। शुरुआती नतीजों में ग्रीन पार्टी को 14.1%, एसीटी न्यूज़ीलैंड को 10.5% और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट पार्टी को 9.3% वोट मिले हैं। खास तौर पर, किउले वोंग के नेतृत्व वाली ऑपरचुनिटी पार्टी 5.4% वोट हासिल कर संसद में प्रवेश के लिए ज़रूरी 5% की सीमा पार करती दिख रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन पहले ही इस पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार कर चुके हैं। 2023 के चुनाव में भी नेशनल पार्टी को न्यूज़ीलैंड फर्स्ट और एसीटी पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनानी पड़ी थी।
मतदान और प्रमुख चुनावी मुद्दे
न्यूज़ीलैंड में आम चुनाव के लिए मतदान 7 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक हुआ, जबकि अग्रिम मतदान की प्रक्रिया 26 अक्टूबर को ही शुरू हो गई थी। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व वाली नेशनल पार्टी ने जहां वित्तीय अनुशासन और बजट घाटा कम करने पर जोर दिया, वहीं पूर्व पीएम क्रिस हिपकिंस के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया। देश की सुस्त अर्थव्यवस्था और 5.7% तक पहुंची बेरोजगारी दर मतदाताओं के लिए चिंता का विषय रही।
न्यूज़ीलैंड की चुनावी प्रणाली
न्यूज़ीलैंड में मिश्रित सदस्य आनुपातिक (MMP) चुनाव प्रणाली लागू है, जिसमें मतदाता दो वोट डालते हैं — एक अपने क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए और दूसरा अपनी पसंदीदा पार्टी के लिए। इसी व्यवस्था के कारण अक्सर किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाता और गठबंधन सरकारें बनती हैं। संसद की 120 सीटों में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है।
इनपुट: IANS



