नयी दिल्ली: रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही ने छीन ली उनकी नौकरी

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भारत के प्रशासन की सुस्ती और लापरवाही का एक और पुख्ता सबूत सामने आया है. ताज़ा खबरों के मुताबिक जो रेल कर्मचारी काफ़ी लंबे से अवैध रुप से अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे. उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरु की गयी है.

 

जानकारी के मुताबिक वो रेल कर्मचारी, जो लंबे समय से बिना किसी अनुमति के अनुपस्थित चल रहे हैं. या फिर सरकारी नौकरी के नाम पर बिना उपस्थिति दर्ज कराए मौज काट रहे कर्मचारी,  उनके ऊपर अब रेल मंत्रालय का डंडा चलने वाला है. बताया जा रहा है कि भारतीय रेलवे ने ऐसे 13,000 कर्मचारियों की पहचान की है जो कि लंबे समय से बिना बताए अपनी ड्यूटी से भाग रहे हैं. इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है.

रेलवे ने एक बयान में कहा है कि रेल मंत्रालय ने संगठन का प्रदर्शन बेहतर करने और निष्ठावान व मेहनती कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए एक अभियान शुरू किया था. यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है.

इस बयान के अनुसार, ‘रेलवे के विभिन्न प्रतिष्ठानों में लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारियों की पहचान करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया गया. इस अभियान के परिणाम में रेलवे ने अपने लगभग 13 लाख कर्मचारियों में से 13 हजार से भी अधिक ऐसे कर्मचारियों की पहचान की है, जो लंबे समय से असंवैधानिक तौर पर अनुपस्थित हैं.  इसके अनुसार रेलवे ने इन अनुपस्थित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के लिए नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है.

रेलवे ने सभी अधिकारियों से विचार-विमर्श करके लम्बी तहकीकात के बाद कर्मचारियों की सूची से इन लोगों का नाम हटाने का निर्देश दिया है.

इसी बीच रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही को देखते हुये रेलवे के फ्लेक्सी फेयर प्रणाली  से जुड़ा एक नियम लागू किया है. इस नियम के अनुसार जब तक नए कर्मचारियों को रेलवे में रखा नहीं जाता है, तब तक रेलवे का किराया बढ़ा दिया गया है.

 

 

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