प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नए बदलाव समझें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कुछ बदलाव किए हैं. जिस पर तुरंत कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ने बयान देते हुए कहा कि ये बदलाव किसान विरोधी हैं. आज चर्चा करते हैं इस खबर पर.
सबसे पहले ये जानते हैं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या हैं
मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के ल्रक्ष्य की तरफ कदम हुए 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरूआत की. इसका उद्देश्य ये था कि किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से यदि किसानों की फसल खराब हो जाती है, तो किसानों को मुवावजे से उनके नुकसान की भरपाई की जाती है.किसानो को कुल बीमा रकम का खरीफ सीज़न में खाद्यान्नों और तिलहनों के लिये 2 प्रतिशत तथा रबी फसलों के लिये 1.5 प्रतिशत पैसा देना होता था. इसके अलावा अगर किसान अपने खेतों में कोई वार्षिक व बागवानी फसल लगाता है तो इसके लिए उनको 5 प्रतिशत पैसा देना होता है. बाकी जो पैसा बचता है उसका भुगतान केंद्र व राज्य सरकार मिलकर आधे – आधे पैसे के हिसाब से करती हैं ताकि किसी आपदा की परिस्थिति में अगर किसान की फसल खराब हो जाए तो किसान को दिक्कतों का सामना ना करना पड़ें.


अब आपको बताते हैं कि कांग्रेस द्वारा इसे किसानों के विरूध क्यों बताया ?
बैठक में फैसला लिया गया कि केंद्र सरकार सरकार जो जिले सिंचित हैं वहां 25% तथा जो जिले सिंचित नहीं हैं उसका 30% प्रीमियम ही देगी. इस बात पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि पहले की तुलना में केंद्र सरकार ने सब्सीडी में जो कमि की गई है इस कारण किसाने को जो पहले हिस्सा 2% देते थे. अब उनको 27% हिस्सा देना पड़ेगा. ये तो किसानो के लिए एक बहुत ही बुरी खबर है. जब कांग्रेस द्वारा प्रेस ब्रीफिंग में ये बात बोली गई. इसको लेकर उसकी समझ पर भी सवाल उठाए जा रहें है. इस पर सरकार की तरफ से जवाब देते हुए कहा गया है कि किसानों को जितना प्रीमियम पहले देना होता था उतना ही अब देना पड़ेगा. केंद्र सरकार ने जो सब्सीड़ी कम की है वो हिस्सा राज्य सरकार देगी.
अब इसमें कुछ और बदलाव किए गए हैं वो भी समझ लेते हैं –
पहला बदलाव- पहले जो कंपनियां होती थी वो बीमा कवर के लिये बोली लगाती थी तो उनको ज्यादात्तर राज्यों में 6 माह या 1 साल के लिए वो टेंडर दिया जाता था. अब इसको 3 साल कर दिया गया है.
दूसरा बदलाव – पहले जो किसान बैंक से कृषि ऋण लेते वो अपने आप इस स्कीम का हिस्सा बन जाते थे और जिन्होनें बैंक से कृषि ऋण नहीं लिया उनके लिए इस स्किम से जुड़ना स्वैछिक था. अब सबके लिए इसे स्वैछिक बना दिया गया है.
तीसरा बदलाव- पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र सरकार प्रिमियम का पहले 50% हिस्सा देती थी अब 90 % हिस्सा देगी.
ये बदलाव खरीफ 2020 सीजन से लागू किया जाएगें.

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इस स्कीम की कुछ खामिया भी देख लेते हैं-
इस योजना के अंतर्गत जंगली जानवरों जैसे- हाथी, नील गाय, जंगली सूअर आदि द्वारा नष्ट की जाने वाली फसलों से संबंधित जोखिम और नुकसान को शामिल नहीं किया गया है। यह कुछ राज्यों के किसानों के लिये एक बड़ी समस्या है।
ये स्कीम किसानों के लिए है और ज्यादात्तर किसानों उतने शिक्षित नहीं होते है. जिस कारण अधिकत्तर किसानों को इन योजनाओं की जानकारी ही नहीं है या फिर ये नहीं पता की फसल खराब हो जाने के बाद हम मुआवजा कैसे ले सकते है.