महराजगंज: नेपाल से छोड़े गए पानी से नारायणी नदी उफान पर, 40 साल का रिकॉर्ड टूटा, कई गांव जलमग्न
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में नेपाल से छोड़े गए पानी और पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश ने भारी तबाही मचाई है। नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर पिछले 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुका है, जिससे जिले…
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में नेपाल से छोड़े गए पानी और पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश ने भारी तबाही मचाई है। नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर पिछले 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुका है, जिससे जिले के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस बाढ़ से लगभग 5,000 की आबादी प्रभावित हुई है और प्रशासन राहत व बचाव कार्य में जुट गया है।
नदी के उग्र रूप के कारण जिले के तीन गांवों में पानी भर गया है। वाल्मीकि बैराज से पांच लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, नेपाल स्थित देवघाट पर पानी का डिस्चार्ज 6,24,000 क्यूसेक है, जबकि वाल्मीकि बैराज से 5,01,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
राहत और बचाव कार्य जारी
बाढ़ की सबसे ज्यादा मार सोहगीबरवा, शिकारपुर, भोथहा और निचलौल तहसील के गेड़हवा जैसे संवेदनशील इलाकों पर पड़ी है, जहां दर्जनों घर पानी में डूब गए हैं। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रभावित ग्रामीणों को राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इन राहत शिविरों में प्रशासन ने सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) के जरिए भोजन-पानी की व्यवस्था की है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीमों को भी तैनात किया गया है।
इनपुट: IANS



