मेरठ 'नीला ड्रम' हत्याकांड: पत्नी और प्रेमी को सज़ा का इंतज़ार, फांसी की मांग कर रहा पीड़ित परिवार
उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए चर्चित 'नीला ड्रम' हत्याकांड में बुधवार को अदालत अपना फैसला सुनाएगी। इस मामले में मृतक सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को दोषी ठहराया जा चुका है और अब…
उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए चर्चित 'नीला ड्रम' हत्याकांड में बुधवार को अदालत अपना फैसला सुनाएगी। इस मामले में मृतक सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को दोषी ठहराया जा चुका है और अब दोनों को सज़ा सुनाई जानी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सौरभ के परिजन दोषियों के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं और न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाने को तैयार हैं।
सौरभ के परिवार ने दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की अपील की है। सौरभ की मां ने कहा, "हम चाहते हैं कि उन्हें मौत की सजा दी जाए। अगर मौत की सज़ा से भी कोई कड़ी सजा हो, तो उन्हें वही दी जानी चाहिए।" उन्होंने यह भी बताया कि वह नवरात्र के व्रत और पूजा में दोषियों के लिए फांसी की प्रार्थना कर रही हैं।
न्याय के लिए लंबी लड़ाई
सौरभ के भाई राहुल राजपूत ने कहा कि उनका परिवार पिछले 15-16 महीनों से अदालतों के चक्कर लगा रहा है और वे शुरू से ही दोषियों को मृत्युदंड दिलाने के इरादे से यह केस लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर दोनों को फांसी की सजा नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अपील करेंगे। जब तक मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड नहीं मिलेगा, तब तक चैन की सांस नहीं लेंगे।"
वहीं, जेल में बंद मुस्कान ने अपनी बेटी और माता-पिता से मिलने की इच्छा जताई है। उसने जेल प्रशासन से परिवार को चिट्ठी लिखने की अनुमति भी मांगी है। हालांकि, जब IANS की टीम बुधवार सुबह मुस्कान के घर पहुंची, तो दरवाजे बंद मिले और उसके माता-पिता ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह हत्याकांड पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। मार्च 2025 में मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल की मदद से पति सौरभ की हत्या कर दी थी। इसके बाद उन्होंने शव के टुकड़े-टुकड़े कर उन्हें घर में ही रखे एक नीले ड्रम में छिपा दिया था। पुलिस ने पिछले साल 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में 30 सितंबर को जिला जज अरविंद कुमार ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी करार दिया था। जुलाई 2025 में शुरू हुए इस केस के ट्रायल में 13 महीनों के दौरान 126 तारीखों पर 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज हुए।
इनपुट: IANS



