गांजा तस्करी: 2019 के एक मामले में दोषी को 10 साल की सज़ा, गुना की अदालत का फैसला
मध्य प्रदेश के गुना की एक विशेष अदालत ने 2019 के एक अंतर-राज्यीय गांजा तस्करी मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया…
मध्य प्रदेश के गुना की एक विशेष अदालत ने 2019 के एक अंतर-राज्यीय गांजा तस्करी मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सफलता नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की भोपाल यूनिट को मिली है।
यह पूरा मामला 17 अगस्त, 2019 का है, जब एनसीबी की टीम ने एक खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की थी। टीम ने गुना के भोपाल बाईपास चौराहे पर एक वैगन-आर कार को रोका, जिसमें से 54.380 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। यह मात्रा एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत व्यावसायिक श्रेणी में आती है।
चालाकी से छिपाया गया था गांजा
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि गांजे की खेप को बहुत सावधानी से कार में छिपाया गया था। एडहेसिव टेप में लिपटे कुल 28 पैकेट कार की डिक्की में रखे एक काले बैग और ड्राइवर व सामने वाली सीट के बीच मौजूद प्लास्टिक पैनल के अंदर से मिले थे। पूछताछ में आरोपी ने बताया था कि यह खेप आंध्र प्रदेश से लाई गई थी और इसे दिल्ली ले जाया जा रहा था।
अदालत का फैसला और NCB की प्रतिक्रिया
इस मामले में राजस्थान के सूरतगढ़ स्थित आर.सी.पी. कॉलोनी के निवासी राजेश पाल को मौके से ही गिरफ्तार किया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, गुना की विशेष एनडीपीएस अदालत ने 8 अक्टूबर, 2026 को आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8(सी), 20(बी)(ii)(सी), और 29 के तहत दोषी करार दिया। एनसीबी ने बताया कि मामले में जब्त की गई कार की भी नीलामी कर दी गई है।
एनसीबी ने इस फैसले को ड्रग्स के खिलाफ अपनी 'जीरो-टॉलरेंस' नीति की एक बड़ी जीत बताया है। एजेंसी का कहना है कि यह 'नशा-मुक्त भारत' के लक्ष्य की दिशा में उसके संकल्प को और मजबूत करता है। एनसीबी ने आम लोगों से भी नशीले पदार्थों की तस्करी की जानकारी राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर 1933 पर देने की अपील की है, जिसमें सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है।
इनपुट: IANS



