अमित शाह: बस्तर में नक्सलवाद खत्म, अब हिंसा प्रभावितों के घाव भरने की ज़िम्मेदारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार ने देश से नक्सलवाद को समाप्त कर दिया है और अब प्राथमिकता उन लोगों के घावों को भरने की है जो दशकों की हिंसा से प्रभावित हुए हैं। समाचार एजेंसी IANS की…
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार ने देश से नक्सलवाद को समाप्त कर दिया है और अब प्राथमिकता उन लोगों के घावों को भरने की है जो दशकों की हिंसा से प्रभावित हुए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद ने गरीब आदिवासियों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरी चोट पहुँचाई है।
गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि हिंसा में दिव्यांग हुए लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करना सरकार की ज़िम्मेदारी है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा कार्यक्रमों का हिस्सा था, जिसके तहत प्रभावितों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण दिए जा रहे हैं।
बस्तर का दर्द और सरकारी मदद
गृह मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में एक सहायता शिविर लगाया गया था। इस अभियान से कुल 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को लाभ मिला, जिनमें अकेले बस्तर के 1,570 से ज़्यादा लाभार्थी शामिल थे। अमित शाह के मुताबिक, "ये आंकड़े बस्तर के दर्द और वहां के गरीब आदिवासी परिवारों पर नक्सलवाद के कारण पड़े प्रभाव को दर्शाते हैं।"
उन्होंने कहा कि पांच दशकों तक चले इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों को दिव्यांगता का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी आजीविका और सामान्य जीवन पर गहरा असर पड़ा।
पुनर्वास और आत्मसम्मान पर ज़ोर
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद को खत्म करने का यह मतलब नहीं है कि पिछले पांच दशकों के दुखों को मिटाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "जहां भी इन दुखों के निशान हैं, हमें उन घावों को भरना होगा। प्रभावित लोगों को अपना जीवन फिर से संवारने में मदद करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सम्मान के साथ जी सकें।"
उन्होंने अभियान के एक लाभार्थी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे एक व्यक्ति ने तीन साल बाद पहली बार अपने हाथ से गिलास उठाकर पानी पिया। गृह मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ सहायता नहीं, बल्कि किसी को उसका आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता लौटाने का प्रयास है। सरकार का लक्ष्य नक्सलवाद के कारण हाथ-पैर गंवाने वाले, सुनने की क्षमता या आंखों की रोशनी खोने वाले हर ज़रूरतमंद तक पहुँचकर उन्हें आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जो अब पूरा हो चुका है। अब हिंसा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए भी उतने ही ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
इनपुट: IANS



