देश की हालत ऐसी कि नेशनल लेवल के तैराक को करना पड़ा यह काम !

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देश की हालत यहाँ तक पुहंच गयी की अब एक राष्ट्रीय स्तर के तैराक को सड़क किनारे टी स्टॉल खोलकर चाय बेचनी पड़ रही है. राष्ट्रीय स्तर के तैराक तक को अपने घर का पालन -पोषण करने के लिए चाय बेचनी पड़ रही है। यह देश का दुर्भागय नहीं तो क्या है ?

राष्ट्रीय स्तर के कई पदक जीत चुके गोपाल यादव पटना के काजीपुर इलाके में एक छोटी सी दुकान में चाय बेचने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय स्तर के तैराक गोपाल की ऐसी क्या विवशता रही होगी की उन्हें चाय तक बेचनी पड़ रही है, इसके पीछे का कारण जानकर कोई भी आग – बबूला हो उठेगा। गोपाल ने अपनी चाय की दुकान का नाम नेशनल तैराक टी स्टॉल रखा है. गोपाल ने कई जगहों पर नौकरी के लिए आवेदन किया लेकिन सभी को रिश्वत चाहिए थी, जिसकी वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई।

गोपाल के बच्चे भी अच्छा तैरना जानते है, लेकिन उन्होंने अपने पिता की स्थिति को देखकर तैराकी छोड़ दी. उन्हें अपने अंदर के तैराक को जिंदा रखा है, इसलिए अब गंगा नदी में तैराकी सिखा रहे हैं।आप साफ़ अंदाजा लगा सकते है कि देश की क्या दुर्दशा है।

जब देश के राष्ट्रीय स्तर के तैराक को ही चाय बेचना पड़ जाए। सरकार द्वारा रोज़गार से सम्बधित वादे विफल होते नज़र आ रहें है। अब सवाल यह उठता है कि सरकार अर्थ व्यवस्था को लेकर जो भी दावे कर रही है.या फिर कर चुकी है. वह किस हद तक सही है जब राष्ट्रीय स्तर के तैराक को ही इस तरह को चाय पीना पड़ जाए।

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राज्ये तथा केंद्र सरकार को ऐसे कदम उठाने की आवश्यकता है की देश में रोज़गार के अवसर बढे तथा देश में एथलिटों को संपूर्ण सम्मान मिलना चाहिए। गोपाल यादव की स्थिति देश कीअसलियत को दर्शाती है।