National herald case: पंचकूला में सीज हुआ था 65 करोड़ का प्लॉट, नेशनल हेराल्ड केस में AJL और YI का रिश्ता समझ‍िए?

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National herald case: पंचकूला में सीज हुआ था 65 करोड़ का प्लॉट, नेशनल हेराल्ड केस में AJL और YI का रिश्ता समझ‍िए?

चंडीगढ़:नेशनल हेराल्ड केस में अब तक की कार्रवाई में रोज कुछ न कुछ नया निकलकर सामने आ रहा। इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक कई राउंड की पूछताछ कर चुकी है। नेशनल हेराल्ड केस (National Herald Case) की परतें खंगालने में जुटी ईडी इस जुगत में लगी है कि किस तरह से मामले की जड़ में पहुंचा जा सके, जिससे कि पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जा सके। इस केस में ईडी ने पंचकूला सेक्टर-6 स्थित एजेएल (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) की करोड़ों की जमीन की अटैचमेंट प्रक्रिया को पहले ही पूरा कर चुकी है। आपको बता दें कि मामले में ईडी इससे पहले गुड़गांव और पंचकूला में करीब 64 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुकी है। ईडी (ED) यह भी पता लगाना चाह रही कि किस तरह से आजादी से पहले की बनी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से लेकर 2010 में बनी यंग इंडिया (Young India) तक घोटाले के तार जुड़े हुए हैं। आपको बतादें कि जांच में जुटी ईडी ने हेराल्ड बिल्डिंग (Herald Building) में यंग इंडिया के कार्यालय को भी सील कर दिया है।

कब हुई एजेएल की स्थापना और क्या था मकसद
एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की स्थापना 20 नवंबर 1937 को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान की गई थी। इसको बनाने के पीछे तत्कालीन कांग्रेस नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका थी। इस कंपनी का मकसद तीन समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था, जोकि तीन भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में थे। इनमें नेशनल हेराल्ड (अंग्रेजी), नवजीवन (हिंदी) और कौमी आवाज (उर्दू) शामिल थे।

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कांग्रेस की दुहाई के चलते एजेएल को लगातार मिलता रहा लोन!
कंपनी के निर्माण से लेकर आजादी के कई सालों बाद तक कांग्रेस सत्ता में रही। यही वजह थी कि कांग्रेस से जुड़े होने के चलते एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को आजादी के काफी सालों बाद तक भी सस्ती दरों पर लोन मिलता रहा। कंपनी ने कई राज्यों में सस्ती दरों पर भूमि प्राप्त करने के बावजूद अपने प्रकाशन व्यवसाय को जारी रखा। वहीं 2 अप्रैल 2008 को AJL ने समाचार पत्रों के प्रकाशन को रोक दिया। जिसके बाद 2010 के अंत तक हिसाब लगाने पर करीब AJL पर कांग्रेस पार्टी का 90.21 करोड़ रुपए का ऋण बकाया था। यानी कि कुल मिलाकर कहा जाए तो एजेएल की आड़ में कांग्रेस को फायदा पहुंच रहा था। इसको लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।

एजेएल से जुड़ी पंचकुला जमीन की हेराफेरी का मामला
सीबीआई ने पूर्व में पंचकुला से जुड़े एजेएल जमीन मामले में हुड्डा और मोतीलाल वोहरा की मिलीभगत को लेकर आरोप पत्र दायर किया था। अब जरा इसके पीछे की वजह जान लीजिये। दरअसल आरोपपत्र में इस बात का जिक्र था कि एजेएल को 1982 में पंचकूला में जमीन का एक टुकड़ा आवंटित किया गया था, जिस पर 1992 तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। इसके बाद फर्जी तरीके हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HUDA) ने इसके बाद उस जमीन के टुकड़े को वापस अपने कब्जे में ले लिया। तो सवाल यह उठता है कि अगर ऐसा था तो एजेएल को दोबारा से साल 2005 में उसी दर पर फिर से यह जमीन क्यों दे दी गई। जब इस जमीन का दोबारा आवंटन किया गया तो उस वक्त हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष थे। जबकि आरोपी मोती लाल वोरा चेयरमैन थे। दरअसल एजेएल पर कांग्रेस के नेताओं का कथित तौर पर नियंत्रण था, जिसमें गांधी परिवार भी शामिल है।

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जरा यंग इंडिया को जान लीजिये
साल 2010 तारीख 23 नवंबर, इसी दिन यंग इंडियन नाम की एक नई कंपनी को रजिस्टर्ड कराया गया। जिसमें दो निदेशकों के नाम थे, ये दो लोग थे सुमन दुबे और सत्यन गंगाराम पित्रोदा (सैम पित्रोदा) । कंपनी बनाते वक्त इसे अधिनियम की धारा 25 के तहत एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड कराया गया था। इसके बाद अगले महीने 13 दिसंबर, 2010 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कंपनी का डायरेक्टर बना दिया गया। जरा गौर करियेगा कि सिर्फ एक महीने बाद ही ऐसा होना भी सवाल खड़े करता है। वहीं फिर कुछ समय बाद जनवरी साल 2011 में सोनिया गांधी को इसका डायरेक्टर बना दिया गया।

तो क्या एजेएल का पाप धुलने के लिए बनी यंग इंडिया
नेशनल हेराल्ड केस में सबसे बड़ा खेल यहां से शुरू होता है, जब यंग इंडिया बनाने के कुछ दिनों बाद ही एक फैसला लिया गया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने AJL के सभी ऋणों को यंग इंडियन को ट्रांसफर करने पर सहमति व्यक्त कर दी। यानि कि एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड कंपनी के साथ ऐसा होना अपने आपमें सवाल खड़े करता है। बीजेपी ने भी इसको लेकर आरोप लगाए हैं। जिसका कहना है कि कांग्रेस का ईडी की जांच के खिलाफ विरोध गांधी परिवार के जरिए पूरे-पूरे दो हजार करोड़ रुपए घोटाले को बचाने का प्रयास ही है। यह विवाद यही तक सीमित नहीं कि यंग इंडिया की ओर से एक करोड़ रुपए का उधार लिया गया, बल्कि नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से संबंधित संपत्तियों के स्वामित्व और उसकी कीमत लगाने का मामला भी इसमें शामिल है।

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