मुंबई: पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी और पति पर क्लब के ₹79 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, ED ने दाखिल की चार्जशीट
मुंबई के यूनाइटेड सर्विसेज क्लब (USC) में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने इस मामले में वित्…
मुंबई के यूनाइटेड सर्विसेज क्लब (USC) में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने इस मामले में वित्त विभाग की पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी बर्नाडेट भरत वर्मा, उनके पति भरतकुमार वर्मा और नौ अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में चार्जशीट दाखिल की है। मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
आरोप है कि बर्नाडेट वर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए क्लब के भरोसे को तोड़ा। उन्होंने कथित तौर पर क्लब के असली वेंडरों (सेवा प्रदाताओं) से मिलते-जुलते नामों से फर्जी बैंक खाते खुलवाए और उनमें क्लब के फंड से लगभग 77.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कैसे हुआ करोड़ों के गबन का खुलासा?
ईडी की जांच के मुताबिक, बर्नाडेट और उनके पति ने मिलकर क्लब के 79 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को कई डमी बैंक खातों में भेजा। ये खाते भरतकुमार वर्मा ने धोखाधड़ी से खोले और संचालित किए थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस पैसे को कई फर्जी कंपनियों के बीच घुमाया गया, ताकि इसके स्रोत को छिपाया जा सके। बाद में, यह रकम उनके निजी, संयुक्त और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में जमा कर दी गई।
आलीशान ज़िंदगी और संपत्ति में किया निवेश
आरोपियों ने इस पैसे का इस्तेमाल एक आलीशान जीवनशैली जीने के लिए किया। ईडी ने पाया कि इस रकम से फ्लैट, जमीन और दुकान जैसी अचल संपत्तियां खरीदी गईं, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराए गए, लग्जरी गाड़ियां खरीदी गईं और परिवार के साथ विदेश यात्राएं की गईं। इस मामले का खुलासा अगस्त 2024 में क्लब द्वारा नियुक्त एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के ऑडिट के दौरान हुआ था।
संपत्ति ज़ब्त और आगे की कार्रवाई
धोखाधड़ी सामने आने के बाद आरोपियों ने पैसों का एक हिस्सा ट्रांसफर भी किया था। रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्त किए गए CA की कथित गैर-कानूनी मांगों के चलते एक फाउंडेशन/ट्रस्ट को 11 करोड़ रुपये दिए गए, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से उसी CA और उसके सहयोगियों ने किया। इससे पहले, ईडी इस मामले में 47 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अस्थायी रूप से ज़ब्त कर चुका है, जिसमें मुंबई और रायगढ़ में स्थित फ्लैट, जमीन, दुकानें और बैंक बैलेंस शामिल हैं। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



