MTH: मदर मिल्क बैंक बनी नवजात शिशुओ की जीवनदायिनी | MTH: Mother Milk Bank became the lifeblood of newborns | Patrika News

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MTH: मदर मिल्क बैंक बनी नवजात शिशुओ की जीवनदायिनी | MTH: Mother Milk Bank became the lifeblood of newborns | Patrika News

MTH: मदर मिल्क बैंक बनी नवजात शिशुओ की जीवनदायिनी | MTH: Mother Milk Bank became the lifeblood of newborns | Patrika News

मेडिकल कॉलेज के माध्यम संचालित होने वाले एमटीएच हॉस्पिटल को खास रूप से महिलाओं के लिए ही तैयार किया गया है। भारीभरकम राशि खर्च कर यहां बिल्डिंग खड़ी की गई है। एमवायएच की पहली मंजिल स्थित प्रसूति वार्ड यहां शिफ्ट किया है। अब एमवायएच में डिलेवरी न होकर इसी अस्पताल में होती है। यहां प्रसूति और नवजात के लिए सारी सुविधाएं जुटाई गईं हैं, इन्हीं में से एक है मदर मिल्क बैंक। कई माएं ऐसी होती हैं, जो डिलेवरी के बाद बच्चे को
ठीक तरह से दूध नहीं पिला पातीं। इससे बच्चे को वो पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जो मिलना चाहिए। ऐसे में ये नवजात कमजोर होने के साथ बीमार पड़ जाते हैं। कई बार प्री-मैच्योर बेबी को जन्म देनेवाली प्रसूता को पर्याप्त दूध नहीं आता। अन्य कई कारणों से भी शिशुओं को माताओं से अलग किया जाता है। ऐसे बच्चों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यहां मिल्क बैंक तैयार की गई है।

मां का दूध जरूरी स्त्री रोग विशेषज्ञ और अस्पताल प्रभारी डॉ. अनुपमा दवे बताती हैं कि मां का दूध केवल पोषण ही नहीं, अमृत है, जीवन की धारा है। शिशु को छह महीने तक स्तनपान पर ही निर्भर रखना चाहिए। मां का दूध सुपाच्य होता है। उसमें रोगाणुनाशक तत्व मौजूद होते हैं।

एक लीटर दूध हर दिन मिल रहा डॉ. आर्य बताते हैं कि अभी हमें एक लीटर दूध हर दिन माताओं से मिल रहा है। यह दूध 40 से 50 नवजात शिशुओं को दिया जा रहा है। हालांकि हमें और अधिक दूध की आवश्यकता है। अभी एमटीएच अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती नवजातों को ही मिल्क दिया जा रहा है। जिसके लिए फिलहाल 40 से 50 माताएं दूध उपलब्ध करवा रही हैं। हम
माताओं को जागरूक कर रहे हैं और काउंसलिंग भी की जा रही है ताकि माताएं दूध दान कर सकें। छह माह तक संग्रहित-अस्पताल में मौजूद मिल्क बैंक की खासियत है कि यहां माताओं द्वारा दान किया गया दूध छह माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है। फिलहाल दूध की उपलब्धता कम होने से स्टोर नहीं किया जा रहा।

यह है बैंक का उद्देश्य मदर मिल्क बैंक प्रभारी डॉ. सुनील आर्य ने बताया कि यह बैंक स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य ऐसे नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराना है, जिनको किसी कारणवश मां का दूध नहीं मिल पाता। कई बच्चे प्रीमैच्योर होते हैं तो कई कुपोषित, कई नवजात शिशुओं की मां को दूध नहीं आता, तो कई की प्रसव के दौरान मां चल बसती है। ऐसे शिशुओं के लिए मदर मिल्क बैंक के माध्यम से मां का दूध नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जाता है ताकि उनको पूरा पोषण मिल सके ।

विधिवत अगले माह से मदर मिल्क बैंक की विधिवत शुरुआत अगस्त के पहले सप्ताह में होगी। फिलहाल मिल्क बैंक तैयार हो रही है। डॉ. अनुपमा दवे प्रभारी,
एमटीएच अस्पताल चला रहे अभियान

प्रदेश की मिल्क बैंकों की तुलना में हम अभी सबसे अधिक मिल्क उपलब्ध करवा रहे हैं। इसके लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। डॉ. सुनील आर्य, प्रभारी मिल्क
बैंक और सीएलएमसी



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