Mother’s Day: मिलिए मां और पिता दोनों का फर्ज़ निभा रही हैं सिंगल मदर ड्राइवर्स से

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Mother’s Day: मिलिए मां और पिता दोनों का फर्ज़ निभा रही हैं सिंगल मदर ड्राइवर्स से

Mother’s Day: मिलिए मां और पिता दोनों का फर्ज़ निभा रही हैं सिंगल मदर ड्राइवर्स से

नई दिल्लीः बहुत आसान है यह कहना कि ‘वर्किंग मदर्स अपने बच्चों का उतना ध्यान नहीं रखतीं, जितना एक घर में रहने वाली मां…!’ यकीन मानिए हर वर्किंग मां को गिल्ट फील होता है, जब वह अपने बच्चों को छोड़कर घर से बाहर निकलती है, लेकिन कई बार घर, परिवार और बच्चों की जरूरतें उसे घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर देती हैं। बच्चों की जरूरत और गिल्ट की बीच का यह संघर्ष तब और भी मुश्किल हो जाता है जब वह एक सिंगल मदर हो। इस इंटरनैशनल मदर्स डे (International Mother’s Day 2023) पर आज हम आपको मिलवा रहे हैं कि ऐस महिलाओं से जो मां न सिर्फ एक मां होने का फर्ज बखूबी निभा रही हैं, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी हैं और ज़िंदगी के हर मोड़ पर खुद को साबित कर परिवार को सपोर्ट कर रही हैं।पूरे घर का खर्च अकेले उठा रही हैं 42 साल की सिंगल मदर नीलम
जीवन के संघर्ष और घर की आर्थिक जरूरतें व्यक्ति को समय पहले बड़ा बना देती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है दिल्ली में रहने वाली 42 साल की नीलम की। वे एक सिंगल मदर हैं और अपने दो बच्चों की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ – साथ वे दिन-रात ड्राइवर के तौर पर काम करके घर की आर्थिक जरूरतों को भी अकेले पूरा कर रही हैं। नीलम पिछले 3 सालों से उबर से जुड़ी हुई हैं। आजाद फाउंडेशन की मदद से उन्होंने ड्राइविंग सीखी और टेस्ट क्लियर किया, वहीं से उन्होंने उबर के साथ काम करना शुरू किया। वह रोजाना करीब 10 घंटे ड्राइविंग करती हैं। हर रोज काम के इतने घटों के बाद भी वे चेहरे पर मुस्कान लिए जिंदादिली के साथ अपने दो बच्चों को संभाल रही हैं। नीलम बतौर ड्राइवर खुद को सेफ महसूस करती हैं और उनका कहना है कि उबर नें उन्हें काम करने की स्वतंत्रता दी है। नीलम कहती हैं, “मैं अपने बच्चों और पड़ोसियों के लिए एक प्रेरणा हूं, एक महिला होने के बावजूद मैंने ड्राइवर का काम किया और जारी रखा। लोग कहते थे कि तुम औरत हो, तुम यह काम क्यों कर रही हो, तुम्हें कुछ हो गया तो क्या होगा? लेकिन, मैंने सोचा कि दुर्घटना घर पर भी हो सकती है, और काम करना जारी रखा। मेरा आजतक कोई बुरा अनुभव नहीं रहा। मुझे अब अच्छा लगता है और ड्राइविंग में मजा आता है।”

मां और पिता दोनों का फर्ज़ बखूबी निभा रही हैं 37 साल की उबर ड्राइवर नागिनी

यह जीवन किसी के लिए आसान नहीं, और जब बात सिंगल मदर्स की आती है तो हर एक कदम पर रुकावटें आती हैं और संघर्ष मुश्किल होता जाता। मगर 37 साल की सिंगल मदर और उबर ड्राइवर नागिनी, जीवन की इन कठिनाइयों को हंसकर स्वीकार कर रही हैं और कभी न हार मानने वाला जज़्बा रखती हैं। मुंबई में जन्मीं नागिनी ने महज 2 साल की उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था। उनकी मां ने ही नागिनी और उनके भाई की देखभाल की। घर के खराब हालातों के चलते वे सिर्फ 9वीं क्लास तक ही पढ़ सकीं और 15 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। अब नागिनी पिछले 7 सालों से अपने पति से अलग रह रही हैं और अकेले अपने दो बच्चों को संभाल रही हैं। जीवन में इतने सघर्षों के बाद भी उन्होनें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहने वह सालों तक एक कुक के तौर पर घरों में जाकर खाना बनाती रहीं। फिर, घर – परिवार वालों के प्रोत्साहित करने के बाद 34 साल की उम्र में उन्होनें ऑटो चलाना सीखा और इसके बाद उबर के साथ जुड़ीं। आज उन्हें एक उबर ऑटो ड्राइवर के तौर पर 3-4 साल पूरे हो गए हैं। नागिनी को बहुत गर्व महसूस होता है जब यात्री उनके ड्राइविंग स्किल्स की प्रशंसा करते हैं। उनका कहना है कि कोविड महामारी में लॉकडाउन के मुश्किल समय में उबर नें उन्हें बहुत सपोर्ट मिला। अब वह खुद को पहले से ज्यादा सशक्त महसूस करती हैं और उनका मानना है कि ज्यादा-से-ज्यादा महिलाओं को इस क्षेत्र में आना चाहिए। आज वह एक मां और पिता दोनों की भूमिका निभा रही हैं और वह चाहती हैं कि अपने बच्चों के सपने पूरे हों।

लॉकडाउन में फूड बिजनेस बंद होने के बाद फिर से नई शुरुआत की नंदिनी ने

nandini

कोविड और लॉकडाउन में काम-धंधा बंद होने के बाद तुमकुर जिले के शिरा की रहने वालीं नंदिनी के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया। उनका फूड चाट का अच्छा बिजनस था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से उन्होंने सब खो दिया। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और बेंगलुरु चली गईं। वहां उन्हें उबर ट्रेनिंग के बारे में पता चला। आज वे करीब डेढ़ महीने से उबर में बतौर ड्राइवर के रूप में काम कर रही हैं और 100 से ज्यादा राइड पूरी करके 5 रेटिंग पा चुकी हैं। अब उनका लक्षय अपने सारे लोन चुकाकर फिर से स्टेबिल होना और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है। नंदिनी की मां ने हमेशा से ही उनका साथ दिया है और अक्सर उनकी मां ड्यूटी के दौरान उनके बच्चों की देखभाल करती हैं। जब बच्चों को घर पर संभालने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती तो नंदिनी उन्हें अपने साथ ले जाती हैं। वह कहती हैं कि “महिलाओं के लिए उबर बिल्कुल सेफ है और आजतक मैंने किसी अप्रिय घटना का अनुभव नहीं किया है।” वह ड्राइविंग को महिलाओं के लिए सेफ मानती हैं और कहती हैं कि बतौर ड्राइवर उन्हें अच्छी आय मिल रही है। नंदिनी कहती हैं कि जब भी कोई महिला कुछ हटकर करने की सोचती है तो शुरुआत में उसे कई तरह के डर का सामना करना पड़ता है। मगर उनका मानना है कि महिलाओं को पूरा अधिकार है कि वह कोई भी पेशा चुन सकती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को साहसी होना चाहिए और जीवन में हर चीज के लिए तैयार रहना चाहिए साथ ही अपनी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

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