विपक्षी दलों ने 'मॉक पार्लियामेंट' का किया आयोजन, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर शुक्रवार को विपक्षी नेताओं ने एक 'मॉक पार्लियामेंट' का आयोजन किया, जिसमें चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'महाभियोग' चलाने का संकल्प लिया गया…
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर शुक्रवार को विपक्षी नेताओं ने एक 'मॉक पार्लियामेंट' का आयोजन किया, जिसमें चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'महाभियोग' चलाने का संकल्प लिया गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रतीकात्मक संसद 1 नवंबर को प्रस्तावित एक रैली से पहले आयोजित की गई। विपक्षी नेताओं ने इसे अपनी लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का अधिकार बताया है।
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने कहा कि संसद भवन या उसके आसपास 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित करने के उनके सभी अनुरोध प्रधानमंत्री द्वारा खारिज कर दिए गए थे। उन्होंने कहा, “जब उन्होंने हमारी सारी मांगें ठुकरा दीं, तो स्वाभाविक है कि खड़गे जी, जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, उनके नेतृत्व में हम 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित कर सकते हैं। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित करने का हमें पूरा अधिकार है।”
विभिन्न दलों का साझा रुख
इस मुद्दे पर कई अन्य विपक्षी दलों ने भी अपनी आवाज़ बुलंद की। सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने इस आयोजन को करोड़ों लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा, “जब संवैधानिक संस्थाओं को कुचला जा रहा हो, चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र न रह जाएं, जब अंपायर (चुनाव आयोग) खुद पक्षपाती हो जाए, और जब लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति हमारे नोटिसों पर कोई ध्यान न दें, तो हमारे पास केवल एक ही विकल्प बचता है, इस तरह का राजनीतिक और सार्वजनिक 'महाभियोग' चलाना।”
ब्रिटास ने आगे कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह अपनी नैतिक और कानूनी साख खो चुके हैं। वहीं, सीपीएम के एक अन्य सांसद वी. शिवदासन ने ज्ञानेश कुमार पर सीधे तौर पर RSS और BJP के लिए काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “उन्हें इतने बड़े संवैधानिक पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। वे और उनकी टीम देश की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं।”
आंदोलन और भविष्य की रणनीति
विपक्षी नेताओं ने साफ किया है कि यह विरोध यहीं नहीं रुकेगा। बीके हरिप्रसाद के मुताबिक, “जब तक ज्ञानेश कुमार अहम पदों पर बने रहेंगे, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।” उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस ने हर ब्लॉक स्तर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। जेएमएन नेता मनोज पांडे ने भी ‘इंडिया’ ब्लॉग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश की “तानासाही सरकार” के खिलाफ सड़कों पर उतरने की आवश्यकता है।
इनपुट: IANS



