मोदी सरकार के सवर्ण आरक्षण का बसपा सुप्रीमो मायावती ने किया समर्थन, लेकिन निकाली ये कमियां

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नई दिल्ली: मोदी सरकार आगामी लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने को लेकर कई रणनीतियों का सहारा लेती दिखाई दें रहीं है. इसी कड़ी में मोदी सरकार ने सवर्ण जाति के लोगों को 10% आरक्षण देने का भी फैसला किया है. अब इस ऐलान के बाद कई पार्टियों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया भी रखीं है.

जी हां, आर्थिक आधार पर गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के इस निर्णय पर बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने भी इस फैसले का समर्थन किया है. इस दौरान मायावती ने कहा है की उनकी पार्टी इस अहम फैसले का पूरी तरह से समर्थन करती है और संसद में पेश किए जाने वाले संविधान संशोधन बिल का भी समर्थन करती है.

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सवर्णों को आरक्षण का यह फैसला एक चुनावी स्टंट- मायावती 

आपको बता दें कि मायावती ने वर्तमान समय में एससी/एसटी और ओबीसी श्रेणी के लोगों को मिलने वाले लगभग पचास फीसदी आरक्षण के कोटे के दायरे को बढ़ाने की भी मांग की. ये ही नहीं जहां मायावती ने इस मुख्य फैसले का समर्थन किया वहीं मोदी सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा की सवर्णों को आर्थिक रूप से दिए जाने वाले आरक्षण का फैसला एक चुनावी स्टंट है. सरकार ने यह निर्णयक फैसला पहले क्यों नहीं लिया. ये लोगों को लुभाने का चुनावी छलावा है.

मायावती ने आगे यह भी कहा है की देश में अभी तक एससी/एसटी और ओबीसी को जो 49.5 फीसदी आरक्षण प्राप्त होता है, उसकी समीक्षा करने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी बताया की निरंतर जनसंख्या में बढोत्तरी देखी जा रहीं है, ऐसे में जातियों का अनुपात भी बढ़ रहा है, इसलिए समीक्षा की काफी जरूरत है.

उन्होंने इस दौरान गुजारिश करते हुए कहा है कि बढ़ी हुई आबादी के अनुरूप आरक्षण का अनुपात भी बढ़ाना चाहिए, इसके लिए नई संवैधानिक व्यवस्था लागू भी कि जनि चाहिए. इसके अलावा बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि इन वर्गों को उन जगहों पर भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, जहां इन्हें आरक्षण नहीं दिया जा सकता है.

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बता दें की मोदी सरकार अपने इस मुख्य फैसले को लागू करने के लिए संविधान में पेश किया. इसके लिए लोकसभा और राज्यसभा में संविधान संशोधन बिल पेश किया जाएगा. जहां लोकसभा में एनडीए सरकार के पास बहुमत है, वहीं राज्यसभा में बहुमत नहीं है.