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वैश्विक दबाव और महंगे कच्चे तेल से भारतीय बाज़ार में गिरावट, सेंसेक्स 73,000 के करीब लुढ़का

कमजोर एशियाई बाजारों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी जैसे कई वैश्विक कारकों के दबाव में भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को गिरावट के साथ शुरुआत की। समाचार एजेंसी IANS के…

वैश्विक दबाव और महंगे कच्चे तेल से भारतीय बाज़ार में गिरावट, सेंसेक्स 73,000 के करीब लुढ़का
(फोटो: IANS)

कमजोर एशियाई बाजारों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी जैसे कई वैश्विक कारकों के दबाव में भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को गिरावट के साथ शुरुआत की। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं।

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बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 366.36 अंक (0.50%) की गिरावट के साथ 73,343.33 पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 123.60 अंक (0.54%) टूटकर 22,687.75 पर आ गया। दिन के कारोबार के दौरान यह गिरावट और गहरी हुई, जब सेंसेक्स 73,005.11 के निचले स्तर तक और निफ्टी 22,554.85 के स्तर तक लुढ़क गया।

बाजार के हर कोने में बिकवाली का दबाव

बाजार में बिकवाली का असर चौतरफा देखने को मिला। मुख्य सूचकांकों के अलावा, व्यापक बाजार में भी कमजोरी हावी रही। निफ्टी मिडकैप 1.04% और निफ्टी स्मॉलकैप 0.91% तक गिर गए। सेक्टरों की बात करें तो लगभग सभी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। ऑटो, मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया, जहां 0.98% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी और वित्तीय शेयरों में भी कमजोरी रही।

विशेषज्ञों की राय और बाजार का भविष्य

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में देखी गई तेजी मुख्य रूप से नकदी (लिक्विडिटी) के कारण थी, न कि कंपनियों की कमाई के आधार पर। इस वजह से कई छोटे और मझोले शेयर अपने मूल्यांकन (वैल्यूएशन) के हिसाब से महंगे हो गए हैं, जबकि लार्ज-कैप शेयर अब भी आकर्षक स्तरों पर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अब बाजार में यह असंतुलन ठीक हो रहा है, और निवेशकों का रुझान उचित मूल्यांकन वाले लार्ज-कैप शेयरों की ओर बढ़ सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि निफ्टी का 22,700 के स्तर से नीचे आना बाजार में और गिरावट का संकेत हो सकता है। उनके मुताबिक, 22,590 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर बाजार यहां से संभलता है, तो रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन एक मजबूत वापसी के लिए निफ्टी का 22,840 के पार जाना जरूरी होगा।

वैश्विक बाजारों का हाल

एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली रही। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% तक लुढ़क गए। इसके विपरीत, बुधवार को अमेरिकी बाजारों में तेजी का माहौल था, जहां नैस्डैक लगभग 1% और एसएंडपी 500 0.58% की बढ़त के साथ बंद हुए थे। हालांकि, ब्रेंट क्रूड वायदा का 1% से अधिक बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना वैश्विक महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रहा है, जिसका असर निवेशक धारणा पर पड़ रहा है। इस बीच, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 1,022 करोड़ रुपये और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,614 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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