शेयर बाज़ार: F&O एक्सपायरी पर सेंसेक्स-निफ्टी सपाट, पर स्मॉलकैप-मिडकैप में दिखी रौनक
मंगलवार को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) एक्सपायरी के दिन भारतीय शेयर बाज़ार लगभग बिना किसी बदलाव के सपाट बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते निवेशकों…
मंगलवार को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) एक्सपायरी के दिन भारतीय शेयर बाज़ार लगभग बिना किसी बदलाव के सपाट बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते निवेशकों ने सतर्कता बरती, जिससे मुख्य सूचकांकों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, कारोबार खत्म होने पर BSE सेंसेक्स 8.08 अंक (0.01%) गिरकर 73,598.67 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 भी 3.45 अंक (0.02%) की मामूली गिरावट के साथ 22,749.75 पर बंद हुआ। वहीं, बैंकिंग सेक्टर पर दबाव दिखा और बैंक निफ्टी 0.72% फिसलकर 53,974.90 पर बंद हुआ।
छोटे-मझोले शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी
हालांकि, बड़े सूचकांकों की सुस्ती के विपरीत व्यापक बाज़ार में खरीदारी का उत्साह बना रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की शानदार तेजी आई, और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर बंद हुआ। बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान दिखाता है कि निवेशक दूसरी तिमाही के नतीजों के आधार पर चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मौके तलाश रहे हैं।
सेक्टरों का मिला-जुला प्रदर्शन
सेक्टरों के स्तर पर तस्वीर मिली-जुली रही। एक तरफ निफ्टी सीमेंट में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, और प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज व आईटी सेक्टर भी कमजोर रहे। वहीं दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया (3.6%), निफ्टी रियल्टी (1.9%), निफ्टी फार्मा (1.9%) और निफ्टी ऑटो (1.5%) में जोरदार बढ़त देखने को मिली। एफएमसीजी, मेटल और पीएसयू बैंक इंडेक्स भी हरे निशान में बंद हुए।
बाज़ार को प्रभावित करने वाले अन्य कारक
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार द्वारा लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपए के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी देने की खबर ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया। इस खरीद का करीब 82% हिस्सा घरेलू निर्माताओं से किया जाना है, जिसे 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उधर, करेंसी बाज़ार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूती के साथ 95.17 पर खुला। हालांकि, ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेश का रुख रुपए पर दबाव बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाज़ार की चाल कॉर्पोरेट नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
इनपुट: IANS



