मणिपुर: सरकारी कर्मचारियों के लिए सुनिश्चित पेंशन और ग्रेच्युटी को मंजूरी, काकचिंग में बनेगा केंद्रीय विद्यालय
मणिपुर में सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' को मंजूरी दे दी गई है, जो 1 जनवरी…
मणिपुर में सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' को मंजूरी दे दी गई है, जो 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त हुए कर्मचारियों को बाजार आधारित पेंशन के बजाय एक सुनिश्चित पेंशन का विकल्प देगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।
इसके साथ ही, कैबिनेट ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी भुगतान नियमों को भी स्वीकृति दे दी है। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए अहम है, जिनके लिए अब तक ग्रेच्युटी का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं था।
नई पेंशन और ग्रेच्युटी के नियम
कैबिनेट ने 'मणिपुर सिविल सर्विसेज (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने) नियम, 2026' को हरी झंडी दिखाई है। इस नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10% योगदान देंगे, जबकि राज्य सरकार की ओर से 18.5% का योगदान किया जाएगा। जो कर्मचारी 25 साल की सेवा पूरी कर लेंगे, उन्हें एकमुश्त राशि के साथ सुनिश्चित मासिक पेंशन मिलेगी। वहीं, 20 साल की सेवा पूरी करने वालों को आनुपातिक पेंशन का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा, परिवार पेंशन और महंगाई राहत (डीआर) की सुविधा भी इसमें शामिल है।
मौजूदा कर्मचारियों को इस योजना को चुनने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है, जबकि नए कर्मचारियों को नियुक्ति के 30 दिनों के भीतर अपना विकल्प चुनना होगा। इसी तरह, 'मणिपुर सिविल सर्विसेज (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत ग्रेच्युटी भुगतान) नियम, 2026' भी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। केंद्र सरकार के 2021 के नियमों पर आधारित इन नियमों के तहत अब एनपीएस कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति और मृत्यु ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
काकचिंग जिले को मिली केंद्रीय विद्यालय की सौगात
शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत, कैबिनेट ने काकचिंग जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इसके लिए वाबागई (राजस्व गांव संख्या-66) में लगभग 4 एकड़ (1.6187 हेक्टेयर) सरकारी भूमि शिक्षा विभाग को आवंटित की जाएगी। गौरतलब है कि 2016 में जिला बनने के बाद से काकचिंग में कोई केंद्रीय विद्यालय नहीं था और सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों की संख्या भी सीमित थी। सरकार का मानना है कि इस कदम से जिले के बच्चों को अपने घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
इनपुट: IANS



