‘बैंडिट क़्वीन’ साधना पटेल की हुई गिरफ्तारी, जानिए क्या है कहानी

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'बैंडिट क़्वीन' साधना पटेल
'बैंडिट क़्वीन' साधना पटेल

‘बैंडिट क्वीन’ फूलन देवी के बारें में तो सभी ने सुना होगा। अब मध्य प्रदेश के विंध्य से 21 वर्षीय खूंखार ‘बैंडिट क्वीन’ साधना पटेल को गिरफ्तार किया गया है। साधना पटेल विंध्य क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय थी और मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 20,000 रुपये का इनामी थी। मध्य प्रदेश की सतना पुलिस ने साधना पटेल को गिरफ्तार किया। जिले के बीहड़ों में सतना एसपी रियाज इकबाल द्वारा शुरू किए गए एक डकैत विरोधी अभियान के दौरान डाकू पुलिस के हाथ में आयी।

पुलिस को सूचना मिली थी कि साधना या तो एनसीआर क्षेत्र में रह रही है या झाँसी के मौरानीपुर में, पुलिस ने दो टीमों को दोनों स्थानों पर भेजा, लेकिन बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उसे झाँसी में जंगल के पास देखा गया था। पुलिस टीमों ने इस क्षेत्र में घेराबंदी की और एक अभियान चलाया, जिसके दौरान वे साधना को पकड़ने में सफल रहे। पुलिस के अनुसार, हथियार और दैनिक उपयोग की चीजें उसके कब्जे से बरामद की गईं।

पिछले साल अगस्त में उसके खिलाफ सतना के नयागांव पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था और बाद में पुलिस ने उस पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। यह उल्लेखनीय है कि यह 13 साल बाद कि पिछले साल अगस्त में एक महिला डकैत के नाम पर इनाम की घोषणा की गई थी। 2005 में, सतना पुलिस ने रानी गौड़ पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया था, जो 2012 में एक मुठभेड़ में मारा गयी।

2017 में एक मुठभेड़ में खूंखार डकैत ललित पटेल के मुठभेड़ के बाद साधना का यह गिरोह चर्चा में आया। यह पहली बार था जब साधना और उसके गिरोह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था क्योकि इन लोगों ने 21 अगस्त, 2018 को नयागांव के एक ग्रामीण छोटकू सेन का अपहरण कर लिया था। साधना उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हैं, अपने पिता की मृत्यु के बाद अपनी चाची के साथ मध्य प्रदेश के नयागांव चली आयी थी।

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पुलिस का कहना है कि उसकी चाची एक खूंखार डकैत चुन्नीलाल पटेल की करीबी थी, यह चुन्नीलाल 2015 में एक मुठभेड़ में मारा गया था। साधना बहुत जल्दी डकैतों के संपर्क में आ गई और 2015-16 में, उसने नवल ढाका गिरोह के साथ काम करना शुरू कर दिया, पुलिस का कहना है। बाद में नवल और गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद उसने दीपक नाम के एक अन्य डकैत के साथ एक और गिरोह बनाया।

वर्ष 2017 में एक मुठभेड़ में ललित पटेल की मौत के बाद उसका गिरोह और अधिक सक्रिय हो गया। उसके खिलाफ मप्र में कुल 4 मामले दर्ज किए गए और यूपी में उसके खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए।