मध्यप्रदेश सरकार का नसबंदी पर अजीबो गरीब आदेश

कमलनाथ
कमलनाथ

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने विवादित और अजीबो गरीब आदेश जारी किया जिसको बाद में विवाद होने के बाद वापस तो ले लिया है, उसने बहस का एक मुद्दा जरूर छेड़ दिया कि क्या सरकारे कुछ भी आदेश पारित कर सकती है?
जैसा कि आप जानते ही होगें कि जनसंख्या वृद्दि का एक बहुत बड़ा मुद्दा है जिस पर बहस होती ही रहती है. काफी बार सख्त से सख्त कानून बनाने की भी मांग उठती रहती है. उसी पर कमलनाथ सरकार ने एक अजीब ही आदेश जारी किया. जिसने एक बार तो शायद सबको ही चौंका दिया.

आदेश में अधिकारियों से कहा गया कि वो कम से कम एक व्यक्ति की नसबंदी कराएं और अगर ऐसा नहीं होता है तो उनको जबरदस्ती वीआरएस दे दिया जाएगा और उनके वेतन में भी कटौती की जाएगी. जैसे ही ये आदेश जारी हुए उसको लेकर सवाल उठने शुरू हो गए. इसके बाद सरकार की तरफ से मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि हम सर्कुलर को वापस ले रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सहलावत ने कहा कि राज्य सरकार ने आदेश वापस ले लिया है. हम किसी को बाध्य नहीं करेंगे और हम आदेश का अध्ययन करेंगे. इसके साथ ही एक और बड़ी कारवाई करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन संचालक छवि भारद्वाज का तबादला कर दिया.

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ये आदेश सामने आने के बाद दूसरी पार्टियों ने इमरजेंसी की बात करना शुरू कर दिया.
इस आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी बयान दिया और कहा, ‘मध्यप्रदेश में अघोषित आपातकाल है. क्या ये कांग्रेस का इमरजेंसी पार्ट-2 है? MPHW (Male Multi Purpose Health Workers) के प्रयास में कमी हो, तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय, तानाशाही है.’