LG ने खुद फंड जुटाने के लिए यूनिवर्सिटी को सराहा, CM ने रोज़गार दिलाने वाली शिक्षा की वकालत की

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LG ने खुद फंड जुटाने के लिए यूनिवर्सिटी को सराहा, CM ने रोज़गार दिलाने वाली शिक्षा की वकालत की

LG ने खुद फंड जुटाने के लिए यूनिवर्सिटी को सराहा, CM ने रोज़गार दिलाने वाली शिक्षा की वकालत की

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: आईपी यूनिवर्सिटी के ईस्ट कैंपस के उद्‌घाटन के अवसर पर बोलते हुए उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कैंपस इस बात की मिसाल है कि यूनिवर्सिटीज किस तरह आत्मनिर्भर बनकर अपने लिए फंड्स का इंतजाम खुद कर सकती हैं। एलजी ने बताया कि इस अत्याधुनिक कैंपस के निर्माण पर कुल 387 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिनमें से 346 करोड़ रुपये का फंड यूनिवर्सिटी ने खुद अपने संसाधनों से जुटाया, जबकि 41 करोड़ रुपये का योगदान दिल्ली सरकार ने दिया। प्रोजेक्ट पर 2013 में काम शुरू हुआ और दिसंबर 2014 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इसका शिलान्यास किया था।एलजी ने यहां पढ़ाए जाने वाले अत्याधुनिक कार्सेज को भविष्य की जरूरतों के लिहाज से बेहद जरूरी बताते हुए यह भी कहा कि हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि हमारी यूनिवर्सिटी से पढ़कर निकले छात्र आज दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों की अगुवाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद रैंकिंग में हमारे विश्वविद्यालय दुनिया की दूसरी यूनिवर्सिटियों में पीछे क्यों रह जाते हैं। उन्होंने शिक्षा में जीवन मूल्यों के महत्व पर भी जोर दिया।

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दूसरी ओर, सीएम अरविंद केजरीवाल ने रोजगारपरक शिक्षा की वकालत करते हुए स्कूल-कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आंत्रप्रन्योरशिप प्रोग्राम को बढ़ावा देने की वकालत की। केजरीवाल ने कहा कि हमें बच्चों को नौकरी ढूंढने के बजाय नौकरी देने वाला बनाना है। इसके लिए हमने बिजनेस ब्लास्टर्स आंत्रप्रन्योरशिप प्रोग्राम के तहत 11वीं और 12वीं के तीन लाख बच्चों को बिजनेस करने के लिए प्रेरित किया। आज उन बच्चों से बात करके पता चलता है कि उनका पूरा माइंडसेट बदलता जा रहा है। अब वो बिजनेस, मार्केटिंग और निवेश के बारे में सोचते हैं। अगर हम कॉलेजों में यह प्रोग्राम शुरू कर दें, तो पास होने वाले 50 फीसदी बच्चे खुद अपना बिजनेस शुरू कर देंगे और बाकी के 50 फीसदी बच्चों को नौकरी भी दे देंगे।

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शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि इस देश की राजनीति में अब शिक्षा पर बात होने लगी है। पिछले आठ साल से दिल्ली सरकार ने अपने बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा पर लगाया है। उसी का नतीजा है कि आज सरकारी स्कूलों के नतीजे प्राइवेट स्कूलों से बेहतर आ रहे हैं और 4 लाख से ज्यादा बच्चे प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं। सांसद गौतम गंभीर ने बताया कि उनके जीवन पर उनके शिक्षकों से मिली सीख का कितना गहरा असर पड़ा है। वहीं विधायक ओ.पी. शर्मा ने कहा कि इस कैंपस के बनने से पूर्वी दिल्ली में रहने वाले बच्चों को पढ़ने के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ेगा।

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