सोमवार, 21 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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NSE IPO: आखिरी दिन ग्रे मार्केट प्रीमियम में भारी गिरावट, निवेशकों की चिंता बढ़ी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में निवेश का सोमवार को आखिरी दिन है, लेकिन निवेशकों के लिए एक चिंताजनक संकेत सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ग्रे मार्केट में…

NSE IPO: आखिरी दिन ग्रे मार्केट प्रीमियम में भारी गिरावट, निवेशकों की चिंता बढ़ी
(फोटो: IANS)

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में निवेश का सोमवार को आखिरी दिन है, लेकिन निवेशकों के लिए एक चिंताजनक संकेत सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ग्रे मार्केट में इस IPO को लेकर उत्साह लगातार कम हो रहा है और इसका प्रीमियम (GMP) अब 60 रुपये प्रति शेयर से भी नीचे फिसल गया है।

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ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) किसी भी IPO के लिए बाजार की अनौपचारिक धारणा का एक सूचक होता है। यह बताता है कि शेयर के लिस्ट होने पर निवेशक कितने प्रीमियम की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, यह लिस्टिंग मूल्य की कोई गारंटी नहीं देता। एनएसई IPO का GMP अब घटकर 59 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है, जो इसके इश्यू प्राइस का सिर्फ 3.31 प्रतिशत है। यह गिरावट काफी अहम है क्योंकि 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा के बाद इसका GMP 218 रुपये प्रति शेयर के ऊंचे स्तर पर था।

लगातार घटता GMP

आंकड़ों पर गौर करें तो 17 सितंबर को जब यह IPO खुला था, तब भी इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम 142 रुपये प्रति शेयर (इश्यू प्राइस का 7.96 प्रतिशत) था। तब से इसमें लगातार दबाव देखा जा रहा है। इस गिरावट की एक बड़ी वजह कंपनी के कमजोर वित्तीय प्रदर्शन को माना जा रहा है, जो निवेशकों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की परिचालन से आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष (2025) के 17,140.67 करोड़ रुपये से 3 प्रतिशत कम है। चिंता की बात यह है कि कंपनी की आय का मुख्य स्रोत, यानी ट्रांजैक्शन चार्जेज, भी इसी अवधि में 13,635.76 करोड़ रुपये से 4 प्रतिशत घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गया।

IPO से जुड़ी अहम जानकारी

NSE ने अपने IPO के लिए प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस हिसाब से कंपनी 22,561.57 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है, जिसके तहत 12.64 करोड़ शेयर बेचे जा रहे हैं। यह पूरा IPO एक ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसका मतलब है कि जुटाई गई सारी रकम कंपनी को नहीं, बल्कि उसके मौजूदा निवेशकों को मिलेगी।

इनपुट: IANS

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