कुंभनगर: तंबुओं के शहर में शहीदों का एक गांव

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कुंभनगर: संगम तट पर लगे दुनिया के सबसे बड़े मेले कुम्भ में शहीदों का भी एक गांव बसाया गया है। यहां देश को आज़ाद कराने के साथ—साथ, कारगिल युद्ध, मुंबई 26-11 के आतंकी हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के परिजन यहां श्रद्धांजलि और हवन का हिस्सा बनने आएंगे। कुंभ क्षेत्र के सेक्टर 14 स्थित संत श्री बालक योगेश्वर दास जी महाराज के शिविर में इनके लिए 30 झोपडिया बनीं हैं साथ ही कई सेना टेंट भी लगवाए गए हैं, जिससे शहीदों के परिजनों को अपनेपन का एहसास हो सके। 
साल 2013 के कुंभ में भी इस गांव को बसाया गया था |

Kumbh Photo shaheed

प्रयाग में लगे कुंभ ऐसा दूसरी बार हो रहा है की शहीदों का नगर बसाया गया हो। इसमें अब तक के युद्ध में शहीद होने वाले जवानों को याद करते हुए पूरे क्षेत्र में उनकी बड़ी—बड़ी तस्वीरें लगवाई गई हैं। इस आयोजन में शामिल होने के लिए शहीदों के परिजनों को न्यौता भी भेज दिया गया है। शिविर में 100 से ज्यादा हवन कुंड बनाए गए हैं, जहां लगातार यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इन कुंड में शहीदों के लिए शत कुंडीय अति विष्णु महायज्ञ होंगे जिनमें शहीदों के नाम की आहुतियां दी जाएंगी। इस आयोजन के लिए खास बनारस से पंडित बुलाए गए हैं। शहीदों का ये नगर हर किसी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जिसे देखने के लिए दिनभर लोग यहां जुटे रहते हैं। शहीदों के इस नगर में उनके परिजनों को किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए कई इंतजाम किए गए हैं। हवन कुंड में प्रवेश करने के लिए सभी को गेरू रंग का गमछा पहनना पड़ेगा, जिसके बाद ही कोई श्रद्धालु हवन में बैठेगा। शहीदों के परिजनों के रहने के लिए भी काफी भव्य व्यवस्था की गई है। जिसमें 30 आधुनिक झोपडियां और 16 टेंट बनाए गए हैं। खास बात ये है कि इन सभी टेंटों को आर्मी कलर दिया गया है। बद्री नाथ धाम के श्री बालक योगेश्वर दास जी ने 2005 में पहली बार शहीद परिवारों के लिए अति विष्णु महायज्ञ किया था, जिसमें कारगिल में शहीद हुए जवानों के परिजनों ने शिरकत की थी।

वो शहीद जिनके परिजन होंगे शामिल

कैप्टन विक्रम बत्रा (कारगिल शहीद)
कविता करकरे (मुंबई अटैक)
आशीष पाण्डेय (कारगिल शहीद)
मानसी शिंदे (मुंबई अटैक)