कुंभ से भरेगा प्रदेश सरकार का खज़ाना, लाखों को मिला रोज़गार

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भारत की धर्मपारायण जनता सरकारों का खज़ाना भी भर सकती है एवं लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार भी दिला सकती है, यह साबित किया है कुंभ समागम 2019 ने।  प्रयागराज के संगम तट पर लगभग 50 दिनों तक चलने वाले आस्था, भक्ति व अध्यात्म के इस महासंगम ने उत्तर प्रदेश सरकार को तो मालामाल किया ही है, लाखों लोगों को रोज़गार से भी नवाज़ा है। कुंभ से प्रदेश सरकार को 1.2 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि कुम्भ मेले के अयोज़न से सरकार को 1.2 लाख करोड़ की कमाई हो सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुंभ भले ही एक आध्यात्मिक और धार्मिक आयोजन है, लेकिन इससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों से छह लाख लोगों को रोजगार भी मिला है।


रिपोर्ट के मुताबिक, कुम्भ के आतिथ्य क्षेत्र में करीब ढाई लाख लोगों को रोजगार मिला। इसके अलावा एयरलाइंस और हवाई अड्डों पर करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। करीब 45,000 टूर ऑपरेटरों को भी रोजगार मिला।

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इको टूरिज्म और मेडिकल टूरिज्म क्षेत्रों में भी लगभग 85,000 रोजगार के अवसर बना है। रिपोर्ट के मुताबिक, टूर गाइड, टैक्सी चालक, द्विभाषीय और स्वयंसेवकों के तौर पर 55 हजार नए रोज़गार के अवसर भी सृजित है। इससे सरकारी एजेंसियों तथा निजी कारोबारियों की आय में भी इजाफा होगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 दिन तक चलने वाले कुंभ मेले के लिए 4,200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जो वर्ष 2013 में आयोजित महाकुंभ के बजट का तीन गुना है।

अब तक का सबसे महंगा तीर्थ आयोजन

उत्तर प्रदेश सरकार ने कुंभ के लिए 4,200 करोड़ रुपये की राशि दी है और यह अब तक का सबसे महंगा तीर्थ आयोजन बन गया है। पिछली सरकार ने 2013 में महाकुंभ मेले पर करीब 1,300 करोड़ रुपये की राशि खर्च की थी। कुंभ मेले का परिसर भी इस बार पिछली बार के मुकाबले करीब दोगुने वृद्धि के साथ 3,200 हेक्टेयर है। 2013 में इसका फैलाव 1,600 हेक्टेयर तक था।

बुनियादी ढांचे में सुधार

कुम्भ मेले के आयोजन के लिए प्रयागराज में नौ रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण करने और हवाई अड्डे के एक नए टर्मिनल के निर्माण सहित प्रमुख बुनियादी ढांचे की फिर से नवीकरण कराया गया है। विशाल मेला क्षेत्र में इस नए शहर की स्थापना में 250 किलोमीटर सड़कें और 22 पंटून पुल शामिल हैं, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा अस्थायी शहर बना देगा