चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों का किरेन रिजिजू ने दिया जवाब, 5 सवालों की चुनौती पेश की
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर कांग्रेस पार्टी पर पलटवार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने कांग्रेस के…
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर कांग्रेस पार्टी पर पलटवार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने कांग्रेस के सामने पांच सवालों की एक चुनौती रखी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, रिजिजू का यह हमला उस समय आया है जब कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के अन्य दल मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
रिजिजू ने अपने पोस्ट में लिखा, "मैं कांग्रेस पार्टी को इन बुनियादी सवालों का जवाब देने की चुनौती देता हूं।" उन्होंने सवाल किया कि यदि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया ही दोषपूर्ण है, तो कांग्रेस की अपनी सरकारों द्वारा नियुक्त आयुक्तों के रहते हुए पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 44 सीटों पर क्यों सिमट गई थी? उन्होंने यह भी पूछा कि 2024 में जब ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब कांग्रेस को लगातार तीसरी बार हार का सामना कैसे करना पड़ा?
विपक्ष के आरोप और मांगें
दरअसल, विपक्षी दलों का आरोप है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता से समझौता किया है और वे प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के प्रभाव में काम कर रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का इस्तेमाल मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाने और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में वोटरों को एक बूथ से दूसरे में स्थानांतरित करने के लिए किया गया।
इन आरोपों के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, विवादित एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करना और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह पूरी तरह से पेपर बैलेट से मतदान कराना शामिल है।
रिजिजू के अन्य सवाल
अपनी चुनौती को आगे बढ़ाते हुए किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से पूछा कि क्या उनके मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और 2014 से 2026 के बीच बनी सरकारों के लिए माफी मांगेंगे? उन्होंने मतदाता सूची को लेकर भी एक सवाल उठाया: "क्या वोटर लिस्ट से अवैध अप्रवासी, मृत, शिफ्ट हो चुके या डुप्लीकेट नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?"
इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में हुए एसआईआर का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-2004 में किए गए एसआईआर अवैध थे? रिजिजू ने अपने पोस्ट के अंत में यह भी लिखा कि "एक परिवार की पार्टी बाहरी ताकतों के साथ मिलकर संविधान और भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश कर रही है।"
इनपुट: IANS



