क्या टोक्यो ओलम्पिक में भारत की किस्मत बदल पाएंगे नए खेल मंत्री? एक रिपोर्ट;

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Kiren Rijiju

नरेंद्र मोदी सरकार दुबारा केंद्र में सत्ता में आयी है। अगले साल ओलम्पिक है तो भारत के खेल जगत को मोदी 2.0 सरकार से बहुत उम्मीद है। इस बार खेल मंत्रालय का जिम्मा भारतीय जनता पार्टी में पूर्वोत्तर का चेहरा कहे जाने वाले युवा नेता किरण रिजिजू को सौंपा गया है। खेल मंत्री का पद इस समय और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योकि अगले साल टोक्यो ओलम्पिक है और कुछ नीतिगत बदलाव भारत को ओलम्पिक में अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते है। किरण रिजिजू के खेल मंत्री बनाये जाने पर खेल जगत की तमाम हस्तियों ने उनसे बेहतर कार्य की उम्मीद जताई है और उन्हें इस पद के लिए बधाई दी है।

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खेल मंत्रालय हमेशा से स्वतंत्र प्रभार में रहा है। भाजपा के नेतृत्व वाली पुरानी सरकार में कर्नल (रिटायर्ड) राज्यवर्धन सिंह राठौर थे। वह जयपुर से चुनाव जीते उम्मीद थी कि वही दुबारा खेल मंत्री बनाए जाएंगे।

रिजिजू NDA सरकार की पहली पारी में गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं। उन्हें कई बार खेल संबंधी कार्यक्रमों में शिरकत करते देखा गया। अब जब रिजिजू ने यह कार्यभार संभाल लिया तो खेल जगत आस लगाए बैठा है कि वह अपने पूर्ववर्ती के अच्छे कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और कुछ नई खेल नीतियां लेकर आएंगे, जिससे खेल और खिलाडिय़ों का भला हो सके। कई खिलाडिय़ों और अधिकारियों ने नए खेल मंत्री से मिलने का समय मांगा है ताकि उनके सामने वे अपनी बात रख सकें और परेशानियों से खेल मंत्री को अवगत कराकर कुछ सुझाव भी दे सकें।

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रिजिजू 2014 से सत्तासीन मोदी सरकार में पांचवें खेल मंत्री हैं। सबसे पहले मोदी ने यह जिम्मेदारी सर्वानंद सोनोवाल को दी थी। इसके बाद अल्पकाल के लिए जीतेंद्र सिंह खेल मंत्री बनाए गए। इसके बाद मंत्रीमंडल में जो बदलाव हुए, उसके बाद विजय गोयल खेल मंत्री बने और फिर अपने पहले कार्यकाल के अंतिम साल में मोदी ने एथेंस ओलम्पिक में निशानेबाजी में रजत जीतने वाले राठौर को यह जिम्मेदारी सौंपी थी।